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शिमला, 12 अप्रैल। सुक्खू सरकार ने राज्य के इतिहास में पहली बार मछुआरा समुदाय के उत्थान के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। बजट 2026-27 की घोषणाओं को अमलीजामा पहनाते हुए सरकार ने जलाशयों की मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू कर दिया है और रॉयल्टी दरों में भारी कटौती की है। बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से मछुआरों को बचाने के लिए सरकार ने 100 रुपए प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है।
यदि नीलामी में मछली की कीमत 100 रुपए से कम रहती है, तो सरकार 20 रुपए प्रति किलो तक की सबसिडी देगी। यह लाभ सीधे मछुआरों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जाएगा। मछुआरों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने रॉयल्टी की दरों में क्रांतिकारी बदलाव किया है। पूर्व में 15 फीसदी रहने वाली रॉयल्टी को पहले 7.5 प्रतिशत किया गया था, जिसे अब घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से प्रदेश के 6,000 से अधिक मछुआरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
सरकार द्वारा उन्नत फिंगरलिंग्स की स्टॉकिंग और बेहतर प्रबंधन के कारण प्रदेश के 5 प्रमुख जलाशयों (गोबिंद सागर, पोंग डैम, रंजीत सागर, चमेरा और कोल डैम) में उत्पादन के आंकड़ों में भारी वृद्धि देखी गई है। हिमाचल प्रदेश में 5 प्रमुख जलाशय हैं-गोबिंद सागर (बिलासपुर और ऊना), पोंग डैम (कांगड़ा), रंजीत सागर और चमेरा (चम्बा), तथा कोल डैम (बिलासपुर)।
गोबिंद सागर, कोल डैम, रंजीत सागर और चमेरा जलाशयों में सिल्वर कार्प प्रमुख प्रजाति है, जबकि पोंग डैम में सिंधारा प्रमुख है। अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियों में रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प शामिल हैं। उन्नत फिंगरलिंग्स (70-100 मिमी) के वार्षिक स्टॉकिंग जैसे लक्षित प्रयासों के कारण जलाशय मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
जलाशयों से वर्ष 2022-23 का उत्पादन 549.35 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है, जो इस क्षेत्र में मजबूत प्रगति को दर्शाता है। इन कदमों से न केवल मछुआरों की आजीविका सुरक्षित होगी, बल्कि मत्स्य पालन के क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
