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AAP ने राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाया, अरविंद केजरीवाल ने क्यों हटाया, यहां जानें इनसाइड स्टोरी

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
दिल्ली, 03 अप्रैल। आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच दूरियों की चर्चा काफी समय से चल रहीं थी, लेकिन बृहस्पतिवार को AAP के फैसले ने दोनों के आपसी रिश्तों में गांठ पड़ने की इन चर्चाओं पर मोहर लगा दी। आम आदमी पार्टी ने अपने Blue-eyed boy रहे राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है।

दिल्ली के राजनीतिक हलकों को पिछले कई महीनों से इसका कयास लगाया जा रहा था, लेकिन न तो राघव चड्ढा ही इस पर कुछ बोल रहे थे और न ही आम आदमी पार्टी। हालांकि, लगातार ऐसे संकेत मिल रहे थे कि पार्टी और राघव चड्ढा के बीच सबकुछ सामान्य नहीं है।

अरविंद केजरीवाल की सबसे बड़ी खुशी में नहीं हुए शामिल
आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के रिश्तों में आई दरार पहली बार तब सार्वजनिक हो गई, जब अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों के दिल्ली शराब घोटाले के केस में राहत मिली।

फरवरी के अंत में जब शराब घोटाले में ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत ‘आप’ के कई नेताओं को आरोपमुक्त किया तो यह फैसला अरविंद केजरीवाल के लिए पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी खुशी का पहल बताया गया।

जब पूरी आम आदमी पार्टी इस फैसले का जश्न मना रही थी, तब राघव चड्ढा न तो इस जश्न में शामिल हुए और न ही उन्होंने X (ट्विटर) या अन्य किसी माध्यम से पर इस पर कोई प्रतिक्रिया दी।

Raghav Chadha के सोशल मीडिया ये भी गायब लगती थी AAP 

कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे खास रणनीतिकार और भरोसेमंद माने जाने वाले राघव चड्ढा और पार्टी के बीच दूरी लगातार बढ़ने का अंदाजा उनके सोशल मीडिया से भी लग रहा था। जानकारों की मानें तो हालात ऐसे हो गए थे कि सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने वाले पोस्ट और वीडियो में न तो पार्टी का नाम दिखता था और न ही झंडा या निशान।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी इस बात को लेकर भी असहज थी कि राघव चड्ढा राज्यसभा में पार्टी की नीतियों के मुताबिक नहीं, बल्कि ऐसे मुद्दे उठा रहे थे, जो उनके व्यक्तिगत मुद्दे थे। यानी यह धारणा बनी कि वह पार्टी लाइन से दूर जा रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी कम ही दिखे राघव चड्ढा

इसके अलावा, राघव चड्ढा अब पार्टी के कार्यक्रमों में भी सक्रिय नहीं दिख रहे थे। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान वे कुछ रैलियों और कार्यक्रमों में जरूर नजर आए, लेकिन उसके बाद वे राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने में ज्यादा सक्रिय हो गए।

आप में राघव चड्ढा के भाजपा के नजदीक होने का संकेत गया 

पिछले कुछ समय में कई बार ऐसा हुआ जब उन्होंने सदन में किसी बड़ी समस्या का मुद्दा उठाया और सरकार ने उस पर तुरंत समाधान किया। इन फैसलों पर राघव चड्ढा खुशी जाहिर करते भी दिखे।

इससे पार्टी के भीतर यह संदेश गया कि वे सरकार के नजदीक होते जा रहे हैं। इसी तरह के कई कारणों के चलते आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरी बढ़ती गई, जो अब बड़े संगठनात्मक फैसलों के रूप में सामने आ रही है।

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