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हिमाचल: वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, अवैध गतिविधियों पर नहीं हो रही जांच

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न्यूज अपडेट्स 
कांगड़ा, 30 मार्च। नूरपुर वन विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सूत्रों के हवाले से पंजाब केसरी के पत्रकार दुर्गेश कटोच को रे रेंज की हटली विट से सूचना मिली कि जंगल के समीप निजी भूमि पर संचालित एक आरा मशीन पर अवैध गतिविधियां की जा रही हैं। सूचना में यह भी बताया गया कि यदि उक्त स्थान की जांच की जाए तो वहां पर अवैध रूप से एकत्र की गई खैर सहित अन्य प्रजातियों की लकड़ी बरामद हो सकती है।

यह भी उल्लेखनीय है कि इसी स्थान के आसपास पहले भी अवैध रूप से खैर के हरे पेड़ों को काटा व जड़ से उखाड़ जा चुका है, जिसे पत्रकार दुर्गेश कटोच द्वारा पूर्व में मीडिया में उजागर किया गया था। 

सूत्रों से बार बार खबर मिलने पर 28 तारीख को मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार दुर्गेश कटोच ने दोपहर लगभग 3:30 बजे वन मंडल अधिकारी (DFO) नूरपुर संदीप कोहली को फोन कर मौके पर स्पॉट विजिट करने का आग्रह किया। प्रारंभ में उन्होंने किसी अन्य रेंज के अधिकारियों को भेजने की बात कही, परंतु बाद में रे रेंज के अधिकारियों द्वारा ही जांच किए जाने की बात कही गई।

जब रे रेंज के रेंज अधिकारी सतपाल थिंढ से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्वयं मौके पर आने से इनकार करते हुए टीम भेजने की बात कही। इसके पश्चात लगभग 4 बजे ब्लॉक अधिकारी रविंदर से बातचीत हुई, जिन्होंने पहले कार्यालय में आने को कहा और बाद में बदुखर बुलाया में आने को कहा। पर दुर्गेश कटोच द्वारा उनके बुलाये गये स्थान पर न जकर उनको स्पॉट पर आने का आग्रह किया गया। 

रात लगभग 8:30 बजे ब्लॉक अधिकारी रविंदर मौके पर पहुंचे। आते ही पहले मौके पर पहुंचकर उन्होंने कथित रूप से पैसों के लेन-देन से जुड़ी बातें कहीं, जिससे स्थिति और संदिग्ध हो गई। इसके बाद भी लगभग एक घंटे तक सड़क किनारे मामले को दबाने का प्रयास किया जाता रहा।

बाद में जब अन्य पत्रकार भी मौके पर पहुंचे, तो सभी को उस स्थान पर ले जाया गया जहां आरा मशीन लगी हुई थी। वहां ब्लॉक अफसर द्वारा  गेट को खोलकर अंदर प्रवेश किया गया, जहां भारी मात्रा में लकड़ी का भंडारण पाया गया। मौके पर खैर सहित विभिन्न प्रजातियों की लकड़ी के साथ-साथ खैर के छिलके भी पाए गए, जिनमें हरे छिलके शामिल भी थे जिसे प्रमाणित होता है कि इस खैर के छिलने का कार्य भी किया गया है। 

रात्रि का समय होने के कारण पत्रकार पूरे क्षेत्र का ठीक से चीजो को कैमरा में कैद नही कर पाए। इसी दौरान एक स्थान पर पत्रकार दुर्गेश कटोच पर हमला किया गया।

अब कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं-
ब्लॉक अधिकारी दिन के समय जांच करने के बजाय रात को ही क्यों पहुंचे?
मौके पर मिली खैर की लकड़ी और हरे/सूखे छिलकों का स्रोत क्या है?
संबंधित व्यक्ति के पास  वहां पर भंडारण की गई अलग अलग प्रजाति की लकड़ी का क्या वैध दस्तावेज थे?
और सबसे बड़ा सवाल- क्या यह सब विभागीय मिलीभगत से हो रहा है?

घटना के दौरान पत्रकारों के सामने कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। उल्टा, ब्लॉक अधिकारी के इशारे पर पत्रकार दुर्गेश कटोच पर हमला किया गया, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि इस स्थान पर बड़े स्तर पर अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी क्षेत्र में खैर के पेड़ों को जड़ से उखाड़े जाने का मामला सामने आ चुका है, जिसे दुर्गेश कटोच ने उजागर किया था। अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
Credit: Punjab Kesari

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