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शिमला, 23 मार्च। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश में बढ़ते नशे के खतरे पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया गया है कि नशे के कारोबार में संलिप्त या इसके आरोपी व्यक्ति अब भविष्य में पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
सरकार युवाओं को नशे के जाल से बचाने और समाज में फैल रहे इस गंभीर संकट पर लगाम लगाने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में पंचायती राज अधिनियम में संशोधन हेतु एक नया विधेयक पेश करेगी। इस प्रस्तावित संशोधन के तहत नशा तस्करी या इससे जुड़े मामलों में आरोपी पाए गए लोगों को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाएगा।
सरकार के इस कदम को नशा माफिया के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि समाज को खोखला करने वाले ऐसे तत्वों को राजनीति से दूर रखा जाए। इस फैसले से साफ संकेत गया है कि प्रदेश में अपराध और राजनीति के गठजोड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण स्तर की राजनीति में पारदर्शिता बढ़ेगी और साफ-सुथरी छवि वाले लोग आगे आएंगे। साथ ही, यह कदम युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और समाज को नशा मुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ यह अभियान आगे भी सख्ती से जारी रहेगा और इसमें किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
