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शिमला, 02 फरवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वन विभाग को वर्ष 2030 तक हिमाचल प्रदेश के वन क्षेत्र को बढ़ाकर 31 प्रतिशत करने के लिए एक व्यापक और ठोस कार्ययोजना (रोडमैप) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री आज यहां वन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य का वन क्षेत्र 29.5 प्रतिशत है, जिसे योजनाबद्ध और सतत प्रयासों के माध्यम से बढ़ाया जाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुकी है और इसके दुष्परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 16,376 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हिमाच्छादित, बंजर अथवा अत्यधिक पर्वतीय है, जहां पौधारोपण संभव नहीं है। ऐसे में वन विभाग को प्रत्येक जिले में पौधारोपण के लिए उपयुक्त संभावित क्षेत्रों की पहचान कर चरणबद्ध योजना तैयार करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने देशी प्रजातियों के पौधों के साथ-साथ फलदार और औषधीय महत्व वाले पौधों के रोपण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाग को केवल नए वन क्षेत्रों के विस्तार तक सीमित न रहकर मौजूदा वनों की सुरक्षा और संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही वन संरक्षण में स्थानीय लोगों और समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘राजीव गांधी वन संवर्धन योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत पिछले वर्ष 924.9 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया गया। इस अभियान में 285 महिला मंडल, 70 युवक मंडल, 59 स्वयं सहायता समूह और 13 समुदाय आधारित संगठनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। योजना के अंतर्गत सरकार दो हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण के लिए 2.40 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, साथ ही पौधों की सर्वाइवल दर के आधार पर वार्षिक प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना को ग्रामीण स्तर पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। आगामी वित्तीय वर्ष में राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 3,376 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 1,624 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान की प्रक्रिया जारी है। बैठक में वन विभाग की अन्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
