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नेशनल डेस्क। 1 फरवरी 2026 को पेश हुए केंद्रीय बजट ने 1.19 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को थोड़ा मायूस किया है। हालांकि 8वें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन बजट 2026 के Establishment Expenditure के आंकड़ों ने एक नई बहस छेड़ दी है। जानकारों का मानना है कि इस साल सैलरी बढ़ने की उम्मीदें वित्त वर्ष 2027 तक के लिए टल सकती हैं।
वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट दस्तावेजों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए स्थापना व्यय 8,24,114 करोड़ रुपये अनुमानित है। यह पिछले साल के 7,82,701 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 41,413 करोड़ रुपये (करीब 5.3%) अधिक है।
वेतन आयोग को लागू करने के लिए सरकार को भारी-भरकम बजट की आवश्यकता होती है। व्यय में हुई यह मामूली बढ़ोतरी केवल सालाना वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ते (DA) और नई नियुक्तियों को कवर करने के लिए पर्याप्त लग रही है। इसमें 8वें वेतन आयोग के बड़े एरियर या फिटमेंट फैक्टर के लिए अलग से बड़ा प्रावधान नहीं दिखता।
18 महीने का समय और जुलाई 2027 की समयसीमा
भले ही सरकार ने 15 जनवरी 2025 को आयोग के गठन की घोषणा की थी, लेकिन इसकी रफ्तार काफी कम है। 28 अक्टूबर 2025 को जारी आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
अक्टूबर 2025: आधिकारिक गजट जारी हुआ।
जुलाई 2027: रिपोर्ट सौंपने की संभावित तारीख।
लागू होने की उम्मीद: रिपोर्ट आने के बाद समीक्षा में लगने वाले समय को देखते हुए, कर्मचारियों की जेब में बढ़ी हुई सैलरी 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक ही पहुंचने के आसार हैं।
हालांकि, परंपरा रही है कि नए वेतन आयोग की सिफारिशें पिछली तारीख (1 जनवरी 2026) से लागू होती हैं, जिससे कर्मचारियों को एरियर का लाभ मिलता है। फिलहाल, बजट में किसी विशेष फंड का आवंटन न होना यह संकेत देता है कि सरकार रिपोर्ट आने तक 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है।
