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हिमाचल: निशाना बनाने के बजाय आरडीजी पर PM Modi से मिलें भाजपा नेता: CM सुक्खू

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 12 फरवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भाजपा नेताओं से आपसी राजनीति छोड़कर राज्यहित में एकजुट होने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति से हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2026 से 2031 तक हर साल लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने आरडीजी समाप्त कर प्रदेश के लोगों का हक छीना है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे निशाना बनाने के बजाय भाजपा नेताओं को आरडीजी की बहाली के लिए प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए।” उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार भाजपा नेताओं से आग्रह किया कि प्रदेश सरकार के साथ मिलकर केंद्र के समक्ष हिमाचल का पक्ष रखें और आरडीजी के मुद्दे पर एकजुट होकर लड़ें, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने जानकारी दी कि उन्होंने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम से मुलाकात कर 16वें वित्त आयोग की संभावित सिफारिशों से हिमाचल पर पड़ने वाले प्रभावों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछली सरकार से 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां (वेतन व पेंशन एरियर) विरासत में मिली हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने सुधारों और नीतिगत बदलावों के जरिए भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई, जिससे पिछले तीन वर्षों में 3,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित हुई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पी. चिदंबरम ने प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की, अधिक जानकारी मांगी और इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राज्यों की आय-व्यय स्थिति को ध्यान में रखने का प्रावधान है और 17 राज्यों से आरडीजी समाप्त करते समय पर्वतीय व छोटे राज्यों के हितों की सुरक्षा जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य को 54,296 करोड़ रुपये से अधिक आरडीजी मिला, जबकि वर्तमान सरकार को तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा, पिछली भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजा और 11,431 करोड़ रुपये अंतरिम अनुदान भी मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को पांच वर्षों में कुल मिलाकर करीब 70,000 करोड़ रुपये मिले, लेकिन यदि इनमें से 40,000 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने में लगाए जाते तो आज प्रदेश कर्ज के जाल में न फंसा होता। मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से पूछा कि यह राशि कहां खर्च हुई और किसे इसका लाभ मिला।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने आरडीजी का दुरुपयोग कर फिजूलखर्ची की, जबकि वर्तमान सरकार ने अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाकर सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी पद को समाप्त नहीं करेगी, बल्कि युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि सीमित केंद्रीय अनुदान के बावजूद 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के पेंशन एरियर का भुगतान किया गया है। साथ ही 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के बकाया भी जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खर्च घटाने के लिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में भी तर्कसंगत कटौती की गई है। आईएफएस पदों की संख्या 110 से घटाकर 86 कर दी गई है, अधिकारी स्तर के पद कम किए गए हैं और निचले स्तर के पद बढ़ाए गए हैं। कुछ स्कूलों और कॉलेजों का विलय भी किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार सत्ता संभालने के पहले दिन से ही कठिन फैसले लेकर ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के जरिए आत्मनिर्भर और मजबूत अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश देश को करीब 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करता है और प्रदेश अपने संसाधनों पर अधिकार के लिए पूरी मजबूती से लड़ेगा।

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