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हिमाचल: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बोले - बद्दी घनौली 25 किलोमीटर रेलवे लाइन की DPR तैयार

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हिमाचल डेस्क। बद्दी-घनौली नई रेलवे लाइन के लिए सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। यह रेलवे लाइन 25 किलोमीटर लंबी होगी। हालांकि इसकी स्वीकृति के लिए प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित एजैंसियों से परामर्श व विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन आवश्यक है। लोकसभा में हिमाचल प्रदेश में रेल विस्तार के संबंध में सांसद डा. राजीव भारद्वाज द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी। प्रश्न का उत्तर देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि रेल परियोजनाओं की स्वीकृति एक सतत प्रक्रिया है और निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती।

उन्होंने इस दौरान जानकारी दी कि 63 किलोमीटर लंबी भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन परियोजना 6,753 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत की गई है, जिसमें 75 प्रतिशत केंद्र और 25 प्रतिशत राज्य सरकार की हिस्सेदारी है। भूमि की पूरी लागत राज्य सरकार को वहन करनी है। परियोजना के लिए 124 हैक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, लेकिन अब तक 82 हैक्टेयर ही उपलब्ध करवाई गई है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से 2781 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी में से केवल 847 करोड़ रुपए ही जमा किए गए हैं, जबकि 1934 करोड़ रुपए बकाया हैं। भूमि और धनराशि की कमी के कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई है।

परियोजनाओं और बजट प्रावधानों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि रेल परियोजनाएं राज्यवार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रेलवे के आधार पर स्वीकृत और क्रियान्वित की जाती हैं। वर्ष 2009-14 के दौरान हिमाचल में रेल अवसंरचना पर औसतन 108 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष खर्च किए गए, जबकि वर्ष 2025-26 के लिए यह प्रावधान बढ़ाकर 2716 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो 25 गुना से अधिक वृद्धि दर्शाता है।

1 अप्रैल 2025 की स्थिति के अनुसार हिमाचल प्रदेश में पूर्णत: या आंशिक रूप से पड़ने वाली 17,622 करोड़ रुपए लागत की 214 किलोमीटर लंबाई की तीन नई रेल लाइनें स्वीकृत हैं। इनमें से 64 किलोमीटर लाइन चालू की जा चुकी है और मार्च 2025 तक 8,280 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। नंगल डैम-ऊना-अंदौरा-दौलतपुर चौक (60 किलोमीटर) खंड चालू किया जा चुका है, जबकि दौलतपुर चौक-कार्टोली-तलवाड़ा (52 किलोमीटर लंबी लाइन) पर कार्य जारी है। चंडीगढ़-बद्दी नई लाइन (28 किलोमीटर लंबी लाइन) पर भी 1540 करोड़ रुपए की लागत से काम शुरू हो चुका है।

रेल मंत्री ने बताया कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर में 1337 स्टेशनों का चयन किया गया है, जिनमें हिमाचल के 4 स्टेशन अंब-अंदौरा, बैजनाथ-पपरोला, पालमपुर और शिमला शामिल हैं। अंब-अंदौरा और बैजनाथ-पपरोला स्टेशनों पर विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि पालमपुर और शिमला स्टेशनों की मास्टर प्लानिंग जारी है। मास्टर प्लानिंग एक पुनरावर्ती प्रक्रिया है, इसलिए इस स्तर पर समय-सीमा तय नहीं की जा सकती।

स्टेशन पुनर्विकास कार्य सामान्यत: योजना शीर्ष-53 ग्राहक सुविधाएं के अंतर्गत वित्त पोषित होते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तर रेलवे के लिए 1483 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है, जिसमें से दिसम्बर 2025 तक 1308 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। हिमाचल प्रदेश उत्तर रेलवे के क्षेत्राधिकार में आता है।

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