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हिमाचल: न कॉल न सिम कार्ड, इंटरनेट कॉल करता था चीनी नागरिक, दो दिन और होगी पूछताछ

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हिमाचल डेस्क। दलाई लामा की पावन नगरी मैक्लोडगंज में एक संदिग्ध चीनी नागरिक की मौजूदगी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। बिना किसी कानूनी दस्तावेज (वीजा) के पहाड़ों की वादियों में छिपे इस शख्स के 'डिजिटल पदचिह्नों' ने अब एक रहस्यमयी मोड़ ले लिया है। गुरुवार को जब आरोपी लौ वेननियन को अदालत में पेश किया गया, तो पुलिस ने उसकी गतिविधियों की गहराई से जांच के लिए दो और दिनों की रिमांड हासिल कर ली।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपी का संचार करने का तरीका है। पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों द्वारा जब आरोपी के मोबाइल का फोरेंसिक विश्लेषण किया गया, तो एक अजीब बात सामने आई कि आरोपी ने चीन में किसी भी व्यक्ति से पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क (वॉयस कॉल) के जरिए बात नहीं की।

वह केवल इंटरनेट-आधारित कॉलिंग ऐप्स का उपयोग कर रहा था, जिससे कॉल को ट्रैक करना और उसकी लोकेशन का सटीक पता लगाना चुनौतीपूर्ण होता है। फिलहाल उसके लैपटॉप और अन्य गैजेट्स से डेटा रिकवर किया जा रहा है ताकि उसके यहां रुकने के असली मकसद का पता लगाया जा सके।

पुलिस केवल विदेशी नागरिक तक ही सीमित नहीं है। जिस इमारत में वेननियन अवैध रूप से शरण लिए हुए था, उसके मालिक को भी जांच के घेरे में लिया गया है। गुरुवार को पुलिस ने भवन मालिक से कड़ी पूछताछ की ताकि यह समझा जा सके कि क्या उसे इस विदेशी मेहमान के पास वीजा न होने की जानकारी थी या उसने जानबूझकर तथ्यों को छिपाया।

कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक अशोक रत्न ने पुष्टि की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने रिमांड अवधि बढ़ाने की अनुमति दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहतीं और मामले के हर उस तार को जोड़ा जा रहा है जो किसी बड़ी साजिश या जासूसी की ओर इशारा कर सकता हो।

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