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शिमला, 02 फरवरी। पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को सोलहवें वित्त आयोग द्वारा बंद किए जाने के संबंध में की गई टिप्पणियों को गुमराह करने वाला करार दिया है। सोमवार को जारी बयान में अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सदा हिमाचल के हितों का विशेष ध्यान रखा है। कभी किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दी। यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर कांग्रेस सरकार प्रदेश को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र फोड़ रही है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि नए फॉर्मूले के तहत हिमाचल का हिस्सा वास्तव में बढ़ा है। रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट कोई स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी व्यवस्था थी और 16 वें वित्त आयोग ने सामान्य आरडीजी की सिफारिश नहीं की। हिमाचल सहित कई प्राप्तकर्ता राज्यों में लगातार कमजोर प्रयासों और उच्च प्रतिबद्ध व्यय का पैटर्न देखा गया। हिमाचल का डेवोल्यूशन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। अन्यायपूर्ण कटौती के कांग्रेस के खोखले दावों के विपरीत 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश का विभाज्य पूल में हिस्सा 15वें वित्त आयोग के 0.830 फीसदी से बढ़ाकर 0.914 फीसदी कर दिया है।
नए फॉर्मूले के तहत हिमाचल का पोस्ट-डेवोल्यूशन प्राप्ति 2025-26 के बजट अनुमान में लगभग 11,561.66 करोड़ से बढ़कर 13,949.97 करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग 2,388 करोड़ की वृद्धि है। यह केंद्रीय कर डेवोल्यूशन में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। 15वें वित्त आयोग के तहत कोविड से उबरने में राज्यों की मदद के लिए आरडीजी फ्रंट-लोडेड था और इसे स्पष्ट रूप से समय-बद्ध, संक्रमणकालीन उपाय के रूप में तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्यों को 2025-26 तक लगभग शून्य राजस्व घाटे तक लाना था।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने परिणामों की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि 14वें वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग के तहत बड़े आरडीजी हस्तांतरणों के बावजूद, वास्तविक राजस्व घाटा सामान्य की ओर नहीं बढ़ा क्योंकि कई राज्यों ने राजस्व संग्रहण को मजबूत नहीं किया या व्यय को युक्तिसंगत नहीं बनाया। इसलिए 16वें वित्त आयोग ने सामान्य आरडीजी को जारी रखना प्रतिकूल माना, क्योंकि यह विकृत प्रोत्साहन पैदा कर सकता है और संरचनात्मक सुधारों की दबाव को कम कर सकता है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार राज्यों के साथ भेदभाव नहीं करती है। 16वें वित्त आयोग फॉर्मूले के तहत कई विपक्षी शासित राज्यों को भी डेवोल्यूशन में लाभ हुआ है। 16वें वित्त आयोग द्वारा शुरू की गई क्षैतिज पुनर्वितरण में मानदंडों का पुनः-वेटेज किया गया, जिसमें जनसंख्या/जनसांख्यिकीय प्रदर्शन पर भार बढ़ाया गया और जीडीपी में योगदान के लिए 10 फीसदी वेटेज जोड़ा गया, जबकि क्षेत्रफल पर भार कम किया गया। इस से कई राज्यों को लाभ हुआ, जिनमें कई विपक्षी शासित राज्य भी शामिल हैं, जबकि कुछ अन्य राज्यों को कमी आई। इसलिए 16 वें वित्त आयोग के समायोजन को पक्षपातपूर्ण अभ्यास के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता।
अनुराग ने आयोग के निर्णय को प्रभावित करने वाले मापदंड बताए
अनुराग ने कहा कि हिमाचल का 2023-24 में स्वयं का कर राजस्व जीएसडीपी का लगभग 5.6 फीसदी था जबकि उत्तराखंड का स्वयं का कर प्रयास लगभग 6.1 फीसदी था। यह अंतर महत्वपूर्ण है। उच्च कर प्रयास से केंद्र से ट्रांसफर पर निर्भरता कम होती है। हिमाचल का कुल राजस्व व्यय जीएसडीपी का लगभग 21.0 फीसदी था, जबकि उत्तराखंड का 15.0 फीसदी था, जो दर्शाता है कि हिमाचल में आवर्ती प्रतिबद्धताएं अधिक हैं जो विकास व्यय को सीमित करती हैं। हिमाचल ने 2023-24 में जीएसडीपी का 5.3 फीसदी राजकोषीय घाटा और 2.6 फीसदी राजस्व घाटा दर्ज किया, जबकि उत्तराखंड का राजकोषीय घाटा 2.5 फीसदी और राजस्व अधिशेष 1.1 फीसदी था। लगातार राजस्व घाटा ठीक वही समस्या है जिसे आरडीजी समाप्त करने के लिए बनाए गए थे, न कि बनाए रखने के लिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की बकाया देनदारियां 2023-24 में जीएसडीपी की लगभग 42.8 फीसदी थीं, जबकि उत्तराखंड की 25.5 फीसदी थीं। उच्च ऋण से ब्याज भुगतान बढ़ता है और वित्तीय लचीलापन कम होता है। हिमाचल का कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का हिस्सा अन्य राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है, जो संकेत देता है कि बजट का बड़ा हिस्सा राजस्व व्यय और ऋण सेवा में खपत हो रहा है, न कि उत्पादक निवेश में। उन्होंने कहा कि इन्हीं मापदंड ही कारण 16वें वित्त आयोग ने यह निर्णय लिया कि सामान्य आरडीजी को जारी रखना, जो संरचनात्मक वित्तीय कमजोरियों को छिपाता है, उचित नीति समाधान नहीं है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि आयोग की सिफारिशें इन मापने योग्य वित्तीय वास्तविकताओं पर आधारित हैं, न कि पक्षपातपूर्ण विचारों पर या कांग्रेस की आधारहीन बयानबाजी पर।
