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UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत, डिजिटल ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
नेशनल डेस्क। पिछले कुछ महीनों से यूपीआई इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के मन में एक ही सवाल घूम रहा था- क्या आने वाले वक्त में डिजिटल पेमेंट के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी? आरबीआई गवर्नर के एक बयान के बाद यह आशंका और गहरी हो गई थी कि शायद भविष्य में यूपीआई ट्रांजेक्शन पर कोई शुल्क लगाया जा सकता है लेकिन अब आम बजट 2026-27 के जरिए सरकार ने इस भ्रम पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि यूपीआई ट्रांजेक्शन पर न तो कोई टैक्स लगेगा और न ही कोई नई लेवी, यानी डिजिटल भुगतान फिलहाल पूरी तरह मुफ्त ही रहेगा।

वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने जानकारी दी कि यूपीआई सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने और इसे फ्री बनाए रखने के लिए सरकार ने बजट 2026-27 में 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका मतलब साफ है- यूपीआई यूजर्स को ट्रांजेक्शन के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बजट भाषण में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के लिए सब्सिडी जारी रखने का ऐलान किया। इससे पहले 2025-26 में यह सब्सिडी 2,196 करोड़ रुपये रखी गई थी।

डिजिटल पेमेंट से जुड़े साइबर फ्रॉड को लेकर उठ रहे सवालों पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। नागराजू ने कहा कि बैंकों की तकनीकी खामियों के कारण होने वाले साइबर फ्रॉड तीन प्रतिशत से भी कम हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि जागरूकता से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बजट में बैंकों को “विकसित भारत” के लक्ष्य के अनुरूप तैयार करने के लिए एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है। नागराजू के मुताबिक, पहले इस समिति के नियम और शर्तें तय की जाएंगी, इसके बाद इसका गठन होगा। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेक्टर के लिए भविष्य का रोडमैप तैयार करना है।

वित्तीय सेवा सचिव ने कहा कि मौजूदा समय में बैंकों की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। एनपीए का स्तर कम हुआ है और मुनाफा बेहतर बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बड़े देश को मजबूत बैंकिंग सिस्टम के लिए तीन से चार बड़े बैंकों की जरूरत होती है।

सरकार सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश बढ़ाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई की सीमा 20 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने पर मंत्रालयों के बीच चर्चा जारी है। वहीं, निजी बैंकों में एफडीआई की अधिकतम सीमा 74 प्रतिशत है।

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