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मंडी, 12 फरवरी। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े एक ही तरह के उल्लंघन पर दो अलग-अलग डिपो में की गई भिन्न कार्रवाई ने निगम पर ‘एक पर सितम, दूसरे पर रहम’ का आरोप खड़ा कर दिया है।
मामला बस चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़ा है, जिसे नियमों के अनुसार गंभीर लापरवाही माना जाता है। कुल्लू डिपो के एक चालक को ड्यूटी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर निगम प्रबंधन ने तुरंत निलंबित कर दिया और उसके खिलाफ चार्जशीट जारी की गई। कार्रवाई को उदाहरणात्मक बताते हुए यह संदेश दिया गया कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
लेकिन ठीक इसी तरह के मामले में सुंदरनगर डिपो के चालक के साथ अलग रवैया अपनाया गया। आरोप है कि वहां चालक को केवल नोटिस देकर छोड़ दिया गया, न तो निलंबन हुआ और न ही सख्त विभागीय कार्रवाई।
इस विरोधाभासी कार्रवाई ने निगम की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो कार्रवाई भी एक-सी क्यों नहीं? क्या अलग-अलग डिपो में यात्रियों की जान की कीमत अलग-अलग आंकी जा रही है, या फिर रसूख और दबाव के आगे नियम कमजोर पड़ रहे हैं?
