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शिमला, 13 फरवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित सर्वदलीय बैठक में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त करने के प्रस्ताव पर गहन चर्चा हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रस्ताव हिमाचल प्रदेश के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक को बीच में छोड़कर जाने के लिए भाजपा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह कदम अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस अहम मुद्दे पर दुविधा में है और राज्य हित में अपना रुख स्पष्ट करने में विफल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 275(1) के तहत राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का संवैधानिक अधिकार है, जिसका उद्देश्य राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को कम करना है। यह व्यवस्था वर्ष 1952 से चली आ रही है। उन्होंने चेताया कि यदि यह अनुदान बंद किया गया तो राज्य के विकास कार्य, सामाजिक योजनाएं और वित्तीय संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।
पूर्व भाजपा सरकार के आंकड़े गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में राज्य को 54,000 करोड़ रुपये राजस्व घाटा अनुदान और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में मिले, जबकि मौजूदा सरकार को अब तक केवल 17,000 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद राज्य सरकार पूर्ण वित्तीय अनुशासन के साथ हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ-साथ सीपीआई(एम), आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी प्रधानमंत्री से मिलकर राजस्व घाटा अनुदान बहाल कराने की इच्छा जताई है। इसके विपरीत भाजपा न तो राज्य के अधिकारों के लिए खड़ी हुई और न ही जनता के पक्ष में साहस दिखा सकी।
उन्होंने 2023 की आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग पर भी भाजपा ने सदन से वॉकआउट कर दिया था, जिससे उसका हिमाचल विरोधी रवैया फिर उजागर हुआ।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने भी भाजपा के रवैये की आलोचना की। वहीं, सीपीआई(एम), आप और बसपा ने बिना शर्त राज्य सरकार का समर्थन किया।
पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सभी दलों को प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों को समझते हुए एकजुट होना चाहिए। आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि डॉ. राजेश चानना ने कहा कि राज्य के सीमित संसाधनों को देखते हुए केंद्र से सहायता बेहद जरूरी है। बसपा प्रतिनिधि ने भी कोविड-19 और हालिया आपदाओं के बाद बढ़े वित्तीय दबाव का हवाला देते हुए अनुदान बहाल करने की मांग दोहराई।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन जनता के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है और राज्य सरकार इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
