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शिमला, 15 फरवरी। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और आयुष मंत्री यादवेंद्र गोमा ने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि वह राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के मुद्दे पर प्रदेश की जनता को गुमराह करना बंद करें। मंत्रियों ने कहा कि अनुराग ठाकुर का यह दावा पूरी तरह निराधार है कि केंद्र सरकार ने 20 वर्ष पहले ही आरडीजी बंद करने का निर्णय ले लिया था।
उन्होंने अनुराग ठाकुर को चुनौती देते हुए कहा कि यदि ऐसा है तो वह इस संबंध में केंद्र सरकार की एक भी चिट्ठी सार्वजनिक करें। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद केवल राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। साथ ही उनसे स्पष्ट करने को कहा कि क्या वे हिमाचल प्रदेश को आरडीजी जारी रखने के पक्ष में हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में किया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में आर्थिक कुप्रबंधन हुआ, जिसका खामियाजा प्रदेश को भुगतना पड़ा। मंत्रियों ने कहा हिमाचल प्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेलने के लिए पूर्व भाजपा सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि अनुराग ठाकुर और अन्य भाजपा नेताओं को इधर-उधर की बयानबाजी करने के बजाय आरडीजी के मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख प्रदेश की जनता के सामने रखना चाहिए। मंत्रियों ने कहा कि मुख्यमंत्री कई बार भाजपा नेताओं के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलने की बात कह चुके हैं, लेकिन भाजपा नेता केवल राजनीतिक लाभ लेने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश पर कर्ज के मसले पर गंभीर है और इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अनुराग ठाकुर की सलाह की आवश्यकता नहीं है। दोनों ने आरोप लगाया कि अनुराग ठाकुर और भाजपा के प्रदेश नेता इस मुद्दे पर केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरने और राजनीति करने में व्यस्त हैं। सर्वदलीय बैठक में भाजपा का हिमाचल विरोधी चेहरा उजागर हो चुका है। प्रदेश की जनता ने देखा कि भाजपा नेताओं ने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए बैठक से वॉकआउट किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें हिमाचल के हितों से कोई सरोकार नहीं है।
मंत्रियों ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची के कारण आज प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल के दौरान राज्य को लगभग 54,000 करोड़ रुपये आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में प्राप्त हुए, यानी कुल 70,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता केंद्र सरकार से मिली। लेकिन इन संसाधनों का उपयोग विकास के बजाय ठेकेदारों और चहेते लोगों को लाभ पहुंचाने में किया गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के ऐसे भवन बना दिए, जो आज खाली पड़ी हैं।
