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बिलासपुर, 09 फरवरी। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में खाद्य सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने लोगों की सेहत और कंपनियों की गुणवत्ता प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नौणी क्षेत्र में एक नामी कंपनी की चॉकलेट के भीतर जिंदा कीड़ा और उसके अंडे मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। पीड़ित परिवार ने इस मामले को हल्के में न लेते हुए कंपनी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
नौणी के गांव मंडी मानवा निवासी रमेश चंद कौंडल ने बताया कि वो भाखड़ा विस्थापित सभा के अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि कल उन्होंने स्थानीय बाजार से अपने बच्चों के लिए पांच रुपये की चॉकलेट खरीदी थी।
घर पहुंचने के बाद जब उन्होंने छोटे बच्चे शिवा को केडबरी चॉकलेट देने के लिए उसका रैपर खोला, तो अंदर का नजारा देखकर वह सन्न रह गए। रमेश चंद के अनुसार चॉकलेट के अंदर एक जिंदा कीड़ा रेंग रहा था और उसने चॉकलेट पर अंडे भी दे रखे थे।
गनीमत यह रही कि बच्चे के मुंह में चॉकलेट डालने से पहले ही उनकी नजर इस पर पड़ गई। उन्होंने कहा कि अगर बच्चा यह चॉकलेट खा लेता, तो उसकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ सकती थी और किसी बड़ी बीमारी या जानलेवा खतरे से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
हैरानी की बात यह है कि जिस चॉकलेट में कीड़ा मिला, उस पैकेट पर मई 2026 तक की वैधता तिथि अंकित है। इसके साथ ही पैकिंग पर बैच कोड और अन्य आवश्यक जानकारियां भी दर्ज हैं।
पूरी तरह वैध और बाजार में खुलेआम बिकने वाले उत्पाद में इस तरह की गंदगी मिलना कंपनी की गुणवत्ता जांच प्रणाली और भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रमेश चंद ने बताया कि उन्होंने संबंधित चॉकलेट को सुरक्षित रख लिया है और इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच के लिए भेजा जाएगा।
उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ उनके परिवार का मामला नहीं है, बल्कि आम लोगों और खासकर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। इसी वजह से वे कंपनी के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
इस मामले पर सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विभाग महेश कश्यप ने कहा कि यदि चॉकलेट में इस तरह की गंदगी मिलने की पुष्टि होती है, तो विभाग इसकी गंभीरता से जांच करेगा। उन्होंने बताया कि संबंधित चॉकलेट का सैंपल लिया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी रोष है। लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उपभोक्ताओं का भरोसा बना रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
