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दिल्ली, 14 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के प्रतिष्ठित ITC Maurya Hotel और एक महिला ग्राहक के बीच करीब 8 साल से चले आ रहे विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने होटल को निर्देश दिया है कि वह खराब हेयर कटिंग के कारण हुई मानसिक परेशानी के लिए शिकायतकर्ता Aashna Roy को 25 लाख रुपये का मुआवजा दे।
यह मामला साल 2018 में तब शुरू हुआ था जब Aashna Roy ने होटल के सैलून में बाल कटवाए थे। महिला का आरोप था कि सैलून ने उनकी इच्छा के विरुद्ध गलत तरीके से बाल काटे, जिससे न केवल उनका लुक खराब हुआ बल्कि उनके करियर और मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने शुरुआत में 5.2 करोड़ रुपये के भारी-भरकम मुआवजे की मांग की थी।
इस मामले की कानूनी लड़ाई नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) से शुरू हुई थी। जुलाई 2018 में कमीशन ने होटल को सेवा में कमी का दोषी पाया और होटल को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
हालांकि, ITC Maurya Hotel ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। साल 2023 में पहली बार जब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, तो कोर्ट ने सेवा में कमी के फैसले को तो बरकरार रखा, लेकिन मुआवजे की राशि (2 करोड़ रुपये) पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कमीशन से कहा कि वह मुआवजे की रकम पर दोबारा विचार करे क्योंकि महिला ने इतनी बड़ी राशि के दावे को सही ठहराने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए थे।
जब मामला दोबारा NCDRC के पास गया, तो आशना रॉय ने अपने मुआवजे की मांग को बढ़ाकर 5.2 करोड़ रुपये कर दिया। कमीशन ने एक बार फिर होटल को 2 करोड़ रुपये और उस पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया। होटल ने इस आदेश के खिलाफ फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस बार जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने महिला के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी के अनुमान या अपनी मर्जी के आधार पर करोड़ों रुपये का हर्जाना नहीं तय किया जा सकता। जजों ने कहा कि जब दावा इतना बड़ा हो, तो उसे साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय दस्तावेजी साक्ष्य होने चाहिए, जो इस मामले में नदारद थे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भरोसेमंद मटेरियल मौजूद नहीं है जो 2 करोड़ या उससे अधिक के मुआवजे को सही ठहरा सके। अदालत ने एनसीडीआरसी द्वारा निर्धारित भारी ब्याज और करोड़ों के मुआवजे के आदेश को रद्द करते हुए इसे 25 लाख रुपये तक सीमित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि होटल द्वारा पहले जमा कराई गई 25 लाख रुपये की राशि ही महिला को दी जाएगी।
बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए बिना किसी आधार के बड़ी राशि वसूलने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि हर्जाना वास्तविक नुकसान और उपलब्ध साक्ष्यों के अनुपात में ही होना चाहिए।
