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शिमला, 31 जनवरी। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था जारी रखने के लिए अंतरिम समितियों का गठन कर दिया है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई है।
अधिसूचना के अनुसार प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 31 जनवरी, 2026 को समाप्त हो गया है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के चलते इन संस्थाओं के पुनर्गठन के लिए चुनाव समय पर आयोजित नहीं हो सके। ऐसे में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 120 और 128 के तहत इन प्रतिनिधियों को कार्यकाल समाप्त होते ही भंग माना गया है।
सरकार ने अब धारा 140(3)(b) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के कार्यों के संचालन के लिए समितियों का गठन किया है।
ग्राम पंचायत समिति
खंड विकास अधिकारी – अध्यक्ष
पंचायत सचिव – सदस्य सचिव
पंचायत समिति
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायत समिति – अध्यक्ष
सामाजिक शिक्षा एवं खंड योजना अधिकारी (SEBPO) – सदस्य
पंचायत निरीक्षक/उप निरीक्षक – सदस्य सचिव
(यदि पद रिक्त हों तो बीडीओ द्वारा नामित अधिकारी)
जिला परिषद समिति
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद – अध्यक्ष
जिला विकास अधिकारी – सदस्य
जिला पंचायत अधिकारी – सदस्य सचिव
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्रीय वित्त आयोग से प्राप्त अनुदानों के भुगतान के लिए सदस्य सचिव “मेकर” और समिति का अध्यक्ष “चेकर” की भूमिका निभाएगा।
इस आदेश की प्रतिलिपि सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, जिला विकास अधिकारियों, जिला पंचायत अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों तथा ई-गजट को भेजी गई है। यह आदेश 31 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा।
