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नई दिल्ली, 07 जनवरी। एंटीबायोटिक दवाओं के गलत और अत्यधिक इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल्द ही ऐसा प्रावधान लागू किया जाएगा, जिससे दवा की पैकिंग देखकर ही मरीज और फार्मासिस्ट यह पहचान सकेंगे कि वह एंटीबायोटिक है या नहीं। इसके लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्ताव है कि एंटीबायोटिक दवाओं की पैकिंग पर विशेष रंग, कोड या कोई स्पष्ट निशान अनिवार्य रूप से लगाया जाए। इससे आम लोग भी आसानी से समझ सकेंगे कि दी जा रही दवा एंटीबायोटिक श्रेणी में आती है। सरकार का उद्देश्य बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एंटीबायोटिक के बढ़ते और अनियंत्रित उपयोग पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक लेने से शरीर में रोगाणुरोधी प्रतिरोध यानी एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) विकसित हो रहा है, जो भविष्य में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। अधिकारी ने उदाहरण देते हुए बताया कि दिल्ली में एक 80 वर्षीय महिला मरीज को 18 अलग-अलग एंटीबायोटिक दवाएं देने के बावजूद कोई असर नहीं हुआ, क्योंकि उनके शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित हो चुका था।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बार-बार और अनावश्यक एंटीबायोटिक सेवन से बैक्टीरिया दवाओं के प्रति असरहीन हो जाते हैं। इससे सामान्य संक्रमण भी गंभीर और जानलेवा साबित हो सकते हैं। फिलहाल बाजार में उपलब्ध दवाओं की पैकिंग से आम मरीज यह पहचान नहीं कर पाता कि दी गई दवा एंटीबायोटिक है या सामान्य पेनकिलर अथवा सपोर्टिव मेडिसिन, जिससे भ्रम की स्थिति बनी रहती है।
सरकार और सीडीएससीओ के बीच जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एंटीबायोटिक दवाओं के लिए अलग रंग की पट्टी या बॉक्स, पैकिंग पर स्पष्ट चेतावनी या प्रतीक, क्यूआर कोड या अल्फान्यूमेरिक कोड शामिल हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक जागरूकता अभियान भी शुरू करेगी। इसके लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को आम जनता के लिए सरल और स्पष्ट संदेश तैयार करने को कहा गया है।
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल समुदाय ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पैकिंग स्तर पर ही एंटीबायोटिक की स्पष्ट पहचान होने से ओवर-द-काउंटर बिक्री पर लगाम लगेगी और यह एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस से निपटने की दिशा में एक अहम और प्रभावी पहल साबित होगी।
