न्यूज अपडेट्स
शिमला, 13 जनवरी। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर शब्दों की आग ने माहौल गरमा दिया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की एक फेसबुक पोस्ट ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी बेचैनी बढ़ा दी है। बात सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट की नहीं है, बल्कि उस सोच की है, जो हिमाचलियत, बाहरी अधिकारियों और प्रदेश के हितों के बीच टकराव के रूप में सामने आई है।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर मंडी में दिए गए डिप्टी CM के भाषण का समर्थन करते हुए एक टिप्पणी की। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि कुछ बाहरी राज्यों, विशेषकर यूपी और बिहार से आए आला आईएएस और आईपीएस अधिकारी हिमाचल में हिमाचलियत की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन अधिकारियों को हिमाचल से कोई विशेष सरोकार नहीं है और समय रहते उनसे निपटने की जरूरत है, नहीं तो हिमाचल के हित ही निपट जाएंगे। उनकी इस टिप्पणी को कई लोग सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र पर सवाल के रूप में देख रहे हैं, तो कई इसे हिमाचली अस्मिता की आवाज बता रहे हैं।
विक्रमादित्य सिंह ने अपनी पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि वह बाहरी राज्यों से आए अधिकारियों का पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने यह बात जोड़ी कि ऐसे अधिकारियों को हिमाचली अधिकारियों से सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने लिखा कि जब तक कोई अधिकारी हिमाचल में तैनात है, तब तक उसका पहला धर्म हिमाचल के लोगों की सेवा होना चाहिए, शासक बनने की गलती नहीं होनी चाहिए।
मंत्री की पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। पोस्ट पर सैकड़ों कमेंट आए, जिनमें कुछ लोगों ने विक्रमादित्य सिंह का समर्थन करते हुए लिखा कि हिमाचल के हितों की बात करना गलत नहीं है। कई यूजर्स ने इसे हिमाचली युवाओं और स्थानीय प्रशासनिक सोच से जोड़ते हुए भावनात्मक समर्थन दिया।
वहीं दूसरी ओर, कई लोगों ने इस बयान को खतरनाक करार दिया। उनका कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां प्रशासनिक सेवाओं में क्षेत्रीय विभाजन पैदा कर सकती हैं और अफसरशाही के भीतर अनावश्यक तनाव को जन्म दे सकती हैं। कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि संविधानिक सेवाओं में नियुक्त अधिकारी किसी एक राज्य के नहीं, बल्कि पूरे देश की सेवा करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी खेमे में इसे सरकार की सोच का प्रतिबिंब बताने की कोशिश हो रही है, जबकि सत्ता पक्ष के भीतर भी कई नेता इस बयान को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। प्रशासनिक वर्ग में भी इस पोस्ट को लेकर असहजता की चर्चा है। भले ही आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया सामने न आई हो, लेकिन यह साफ है कि मामला अब सिर्फ एक फेसबुक पोस्ट तक सीमित नहीं रहा।
अभी हाल ही में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपनी राजनीति के तरीके के बारे में भी सोशल मीडिया पर सवाल किया था। जिसे लेकर भी वे काफी चर्चा में रहे थे। उनके इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी थी। अब एक बार फिर विक्रमादित्य ने अधिकारियों पर सवाल उठा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का माहौल बना दिया है।
इस पूरे विवाद के बीच यह बात भी अहम है कि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह पहले ही अपने ही विभाग के कामकाज को लेकर सख्त रुख अपना चुके हैं। हाल ही में राज्य सचिवालय के मुख्य गेट के पास बन रहे नए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय भवन के निर्माण में गंभीर खामियां सामने आने के बाद PWD और सचिवालय में हड़कंप मच गया था। निरीक्षण रिपोर्ट में कॉलम में दरारें, स्टील कवर में कमी और क्यूरिंग प्रक्रिया में लापरवाही जैसे तथ्य उजागर हुए थे। इस पर मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने विभागीय अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश देते हुए 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी और साफ कहा था कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
