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सिरमौर, 06 जनवरी। हिमाचल प्रदेश में जहां अधिकांश सरकारी अधिकारी अपने दफ्तरों तक सीमित रहते हैं और सुबह 10 से शाम 5 बजे तक की ड्यूटी को ही अपना कर्तव्य मानते हैं, वहीं सिरमौर जिले में एक महिला अधिकारी ऐसी भी है जो अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए न समय देखती है, न मौसम।
क्या कोई अधिकारी अपने ही सरकारी वाहन का चालान कर सकता है? आमतौर पर यह सवाल मजाक या हैरानी के तौर पर पूछा जाता है। मगर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यह सवाल हकीकत बन चुका है। यहां की क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ,RTO सोना चंदेल ने न केवल नियमों की किताब पढ़ाई, बल्कि खुद उस पर अमल कर एक ऐसी मिसाल कायम की- जो सिस्टम में ईमानदारी की नई परिभाषा गढ़ती है।
मामला 20 दिसंबर 2025 का है। RTO सोना चंदेल सुबह के समय काला अंब क्षेत्र में वाहनों की नियमित चेकिंग पर निकली थीं। रोजमर्रा की तरह निजी वाहनों के साथ-साथ विभागीय अमले की गतिविधियों पर भी उनकी पैनी नजर थी।
इसी दौरान यह सामने आया कि बैरियर स्टाफ निजी वाहनों का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मचारियों से वाहनों के दस्तावेज दिखाने को कहा। सभी कर्मी आश्वस्त थे कि कागजात दुरुस्त हैं, लेकिन तभी एक कर्मचारी ने हिचकिचाते हुए धीमी आवाज में कहा- मैम, आपके सरकारी वाहन HP63C-7365 का प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) एक्सपायर है।
यह सुनकर वहां मौजूद हर शख्स ठिठक गया। आमतौर पर ऐसी स्थिति में अधिकारी या तो मामले को नजरअंदाज कर देते हैं या बाद में सुधार की बात कहकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन यहां कहानी ने अलग मोड़ लिया।
RTO सोना चंदेल ने न तो सवाल करने वाले कर्मचारी को डांटा और न ही कोई सफाई दी। उन्होंने मौके पर ही अपने सरकारी वाहन का 500 रुपये का चालान काट दिया और तुरंत वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र भी बनवाया।
जानकारों का कहना है कि अगर यह सिर्फ दिखावे की कार्रवाई होती, तो यह बात उसी दिन प्रचारित कर दी जाती। लेकिन यह मामला करीब दो हफ्ते बाद सामने आया, जो इसे और विश्वसनीय बनाता है। RTO की इस कार्रवई को लेकर लोग उनकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं था जब RTO सोना चंदेल ने अपनों के लिए भी कानून में कोई ढील नहीं दी। इससे पहले 27 मई,2025 को हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) अभियान के दौरान उनके पति की स्कूटी HP71-9045 जांच में पकड़ी गई- जिस पर यह प्लेट नहीं लगी थी।
सूचना मिलते ही RTO ने बिना किसी रियायत के 3,000 रुपये का चालान काट दिया। सूत्रों के अनुसार, यह जुर्माना बाद में उन्होंने खुद अपनी जेब से अदा किया। इस घटना ने विभाग और आम जनता के बीच यह संदेश साफ कर दिया कि रिश्ते और पद कानून के रास्ते में नहीं आते।
सख्ती केवल चालान तक सीमित नहीं रही। कामकाज के स्तर पर भी RTO सोना चंदेल का रिकॉर्ड उल्लेखनीय है। वर्ष 2024-25 में उन्हें चालानों के जरिए डेढ़ करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया गया था, जबकि उन्होंने करीब ढाई करोड़ रुपये सरकार के खजाने में जमा कराए।
मौजूदा वित्त वर्ष में भी डेढ़ करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले अब तक करीब पौने तीन करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जा चुका है। इसी उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते परिवहन विभाग की ओर से सिरमौर जिले को टोयोटा की हाइब्रिड वाहन अतिरिक्त पुरस्कार के रूप में प्रदान की गई।
आपको बता दें कि RTO सिरमौर सोना चंदेल ने नवंबर महीने में खनन माफिया और नियम तोड़ने वाले टिप्पर चालकों पर शिकंजा कसते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। सोना चंदेल ने अल सुबह करीब 5 बजे सड़कों पर उतर कर एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
इस विशेष नाकाबंदी अभियान में टीम ने 100 से अधिक वाहनों की जांच की, जिनमें से 37 टिप्परों को नियमों की खुली अवहेलना करते पाया गया। इन सभी पर कुल करीब 9 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया। अल सुबह करीब पांच बजे शुरू हुई यह कार्रवाई दोपहर 11 बजे तक जारी रही।
पुलिस व परिवहन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद भी खनन माफिया अपनी गतिविधियां जारी रखता रहा है, लेकिन इस बार महिला RTO की अचानक सुबह-सुबह की दबिश ने उन्हें बड़ा झटका दिया है। यह पहली बार नहीं है, जब RTO सोना चंदेल ने इस तरह की कार्रवाई की है। इससे पहले भी कई बार कभी रात को तो कभी रविवार के दिन सड़कों पर उतर कर इस तरह की कार्रवाई को अंजाम दे चुकी हैं। यही कारण है कि आज खनन माफिय RTO सोना चंदेल के नाम से डरने लगे हैं।
