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शिमला, 29 जनवरी। हिमाचल प्रदेश के गांवों, किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नाबार्ड ने अगले वित्त वर्ष के लिए हिमाचल को हजारों करोड़ रुपये का कर्ज देने की तैयारी कर ली है। इससे खेती, बागवानी, छोटे उद्योग और ग्रामीण ढांचे को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अगले वित्त वर्ष के लिए हिमाचल प्रदेश को 45,809 करोड़ रुपये का कर्ज देने की क्षमता तय की है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 8.44 प्रतिशत ज्यादा है। इसको लेकर बुधवार को शिमला में मुख्य सचिव संजय गुप्ता की अध्यक्षता में स्टेट क्रेडिट सेमिनार आयोजित किया गया, जहां नाबार्ड ने राज्य फोकस पेपर जारी किया।
नाबार्ड के मुताबिक, सबसे ज्यादा कर्ज एमएसएमई यानी छोटे उद्योगों के लिए तय किया गया है। इस क्षेत्र के लिए 23,827.72 करोड़ रुपये की क्षमता आंकी गई है। वहीं कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए 18,194.90 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अलावा ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने के लिए भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि ग्रामीण विकास मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि छोटे राज्य हिमाचल के विकास में नाबार्ड की भूमिका अहम रही है। स्टेट फोकस पेपर में खेती, बागवानी, दूध उत्पादन, मत्स्य पालन, कृषि-वानिकी और छोटे उद्योगों जैसे क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. विवेक पठानिया ने बताया कि स्टेट फोकस पेपर का मकसद निजी निवेश बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 33,118 करोड़ रुपये का कर्ज बांटा गया, जो तय लक्ष्य का 92 प्रतिशत रहा। उन्होंने जानकारी दी कि 1,147 प्राथमिक कृषि साख समितियों को डिजिटल बनाकर उन्हें मल्टी-सर्विस सेंटर में बदला गया है।
सेमिनार में जल संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र, ग्रामीण सड़कें, ग्रीन एनर्जी, ईवी ढांचा और डिजिटल लोन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया कि नाबार्ड के सुझावों को राज्य के आगामी बजट में जगह दी जाएगी।
