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शिमला, 18 जनवरी। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा है कि चिट्टा जैसे मामलों में आरोपियों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकना कानूनन सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर मनमानी रोक नहीं लगाई जा सकती और लोगों की उन्मुक्तता को सीमाओं में रखने के लिए कानून के दायरे में रहकर ही कदम उठाए जाने चाहिए।
शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि नशे के खिलाफ शासन और प्रशासन के प्रयास तब तक प्रभावी नहीं हो सकते, जब तक जनता को जागरूक नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल सरकारी कार्रवाई से नहीं सुलझेगी, इसके लिए समाज की भागीदारी जरूरी है।
राज्यपाल ने बताया कि जब उनकी ओर से नशे के खिलाफ अभियान चलाया गया था, तब पंचायत प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया था। उस दौरान कुछ प्रतिनिधियों ने पंचायत स्तर पर नशे से जुड़े लोगों को मिलने वाली सुविधाएं रोकने का सुझाव दिया था। इस पर उन्होंने कहा था कि पंचायत प्रतिनिधियों को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। यदि सरकार इस तरह की कार्रवाई करती है, तो उसकी सर्वस्वीकृति होना भी संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ सिर्फ होर्डिंग लगाने और नारे देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि लोगों के बीच जाकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाना होगा।
शिपकी-ला से फिर खुलेगा व्यापार का रास्ता
शिपकी-ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा और तिब्बत से व्यापार शुरू होने के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि इस विषय को राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। अब केंद्रीय विदेश मंत्रालय इस पर विकल्पों पर काम कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन्हीं प्रयासों से शिपकी-ला के रास्ते चीन अधिकृत तिब्बत के साथ व्यापार की पुनः शुरुआत होगी।
राज्यपाल ने कहा कि इस मार्ग के खुलने से किन्नौर सहित प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों के कारोबारियों को बड़ा लाभ मिलेगा। इसके तहत सरकार द्वारा चिन्हित वस्तुएं तिब्बत भेजी जा सकेंगी और वहां से पशमीना सहित अन्य उत्पाद भारत लाए जा सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि शिपकी-ला दर्रा भारत और चीन अधिकृत तिब्बत के बीच सदियों पुराना ऐतिहासिक व्यापार मार्ग रहा है। सतलुज नदी से जुड़े इस मार्ग के जरिए पहले ऊन, मसाले, अनाज, धातु के औजार और स्थानीय हस्तशिल्प का आदान-प्रदान होता था। शिपकी-ला से व्यापार खुलने की संभावना से ओल्ड सिल्क रूट की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं।
