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कांगड़ा, 05 जनवरी। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला स्थित धर्मशाला कॉलेज छात्रा मौत में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। जिसके बाद इस मामले में कई एंगल बदलते दिखाई दे रहे हैं। छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में रविवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ।
इस वीडियो में मामले की एक आरोपी छात्रा ने पीड़िता के साथ रैगिंग होने की बात स्वीकार करते हुए कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। वीडियो सामने आने के बाद अब कॉलेज प्रशासन, एंटी रैगिंग कमेटी और जांच प्रक्रिया-तीनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आरोपी छात्रा यह कहते हुए सुनाई दे रही है कि पीड़िता ने खुद उसे बताया था कि कॉलेज की एक सीनियर छात्रा की ओर से उसकी रैगिंग की गई थी। वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि इस बात की जानकारी एक प्रोफेसर को भी थी और उन्होंने भी रैगिंग होने की बात कही थी।
इन दावों के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि पीड़िता के साथ रैगिंग की जानकारी पहले से थी, तो फिर कॉलेज प्रबंधन और एंटी रैगिंग कमेटी ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। इससे पहले कॉलेज प्रबंधन रैगिंग के आरोपों से इनकार करता रहा है, लेकिन वायरल वीडियो ने उस दावे को संदेह के घेरे में ला दिया है।
अगर आरोपी छात्रा की ओर से वीडियो में कही गई बातें जांच में सही पाई जाती हैं, तो यह मामला केवल छात्रा की मौत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कॉलेज की एंटी रैगिंग व्यवस्था की गंभीर विफलता को भी उजागर करेगा। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या रैगिंग की शिकायत को दबाया गया या फिर लापरवाही बरती गई।
मामले में आरोपी छात्रा की ओर से यह मांग भी उठाई जा रही है कि पीड़िता और उसकी बेस्ट फ्रेंड के मोबाइल फोन की गहन जांच की जाए। दावा किया जा रहा है कि मोबाइल डेटा से घटना से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनमें चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूत शामिल हो सकते हैं।
इसी के साथ पुलिस की टीमें उन अस्पतालों से भी मेडिकल रिकॉर्ड जुटा रही हैं, जहां पीड़ित छात्रा उपचाराधीन रही थी। मेडिकल रिपोर्ट के जरिए छात्रा के अस्पताल में भर्ती होने के कारणों, उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति तथा मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि होने की उम्मीद है।
मामले में एक अन्य प्रोफेसर और एक छात्रा का नाम भी सामने आने के बाद पुलिस ने संकेत दिए हैं कि उनसे भी नियमों के तहत पूछताछ की जाएगी। वायरल वीडियो में किए गए दावों के आधार पर पुलिस अब हर पहलू से जांच कर रही है ताकि किसी भी तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए।
ASP कांगड़ा बीर बहादुर ने बताया कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता और गंभीरता से की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपी छात्राओं से पूछताछ की जा रही है और सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो या बयान को जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। पुलिस का प्रयास है कि सच्चाई तक पहुंचा जाए और दोषियों को बख्शा न जाए।
मनोविज्ञान विषय की प्रोफेसर मोनिका मक्कड़ ने मीडिया को दिए बयान में सवाल उठाया कि अगर रैगिंग की जानकारी पहले से थी तो मामला उसी समय उजागर क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इतने समय बाद सामने आ रहे खुलासे किसी साजिश की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने मांग की कि पुलिस इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करे, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी निर्दोष को फंसाया न जाए।
इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. राजेश चानना ने छात्रा की मौत की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला और दलित उत्पीड़न के बढ़ते मामले बेहद चिंताजनक हैं और यह कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
डॉ. चानना ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रा की मौत के जो भी कारण रहे हों, सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
डिग्री कॉलेज धर्मशाला की छात्रा की मौत का मामला अब केवल एक संदिग्ध मौत नहीं रहा, बल्कि यह रैगिंग, संस्थागत लापरवाही और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रकरण बन चुका है। वायरल वीडियो ने जांच को नई दिशा दी है, लेकिन साथ ही कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं- कि क्या सच सामने आ पाएगा और क्या पीड़िता को न्याय मिल सकेगा।
