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हरिपुरधार (सिरमौर), 14 जनवरी। 9 जनवरी को हरिपुरधार में हुआ भीषण बस हादसा सिरमौर जिले के लोगों के लिए एक ऐसा दर्दनाक मंजर बन गया, जिसे भुलाना आसान नहीं है। इस हादसे में कई यात्रियों की जान चली गई, जबकि अनेक गंभीर रूप से घायल हुए। बस में सवार शायद ही कोई ऐसा यात्री रहा हो, जो बिना चोट के बच पाया हो। लेकिन इसी भयावह दुर्घटना के बीच एक मार्मिक और प्रेरक कहानी सामने आई, जिसने हर आंख को नम कर दिया।
इस हादसे में तीन वर्षीय मासूम तेजस पूरी तरह सुरक्षित बच गया। न उसके शरीर पर कोई चोट आई और न ही चेहरे से मासूम मुस्कान कम हुई। यह किसी चमत्कार से कम नहीं, बल्कि एक मां की ममता, साहस और त्याग का जीवंत उदाहरण है।
जानकारी के अनुसार, कुफरी निवासी तेजस अपनी मां की गोद में बस चालक के पीछे वाली सीट पर बैठा था। मां-बेटा शिमला से माघी पर्व मनाने के लिए अपने गांव जा रहे थे। पहाड़ी रास्तों पर बस का सफर सामान्य चल रहा था कि अचानक बस को तेज झटका लगा, संतुलन बिगड़ा और बस खाई की ओर झुक गई।
खतरे का आभास होते ही तेजस की मां ने एक पल भी गंवाए बिना अपने बेटे को कसकर सीने से लगा लिया। उस क्षण वह केवल मां नहीं, बल्कि अपने बच्चे के लिए सुरक्षा कवच बन गई। बस करीब 200 फुट गहरी खाई में पलटती चली गई। चारों ओर चीख-पुकार, टूटते शीशों और लोहे के चटकने की आवाजें गूंज उठीं।
पूरे हादसे के दौरान मां ने अपने शरीर को ढाल बनाए रखा। हर झटका और हर चोट उसने खुद सह ली, ताकि उसका बच्चा सुरक्षित रहे। हादसे में मां को गंभीर चोटें आईं, लेकिन तेजस पूरी तरह सुरक्षित बच गया।
हादसे के बाद जब राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा, तो चारों ओर दर्दनाक दृश्य था। घायल यात्री कराह रहे थे और कुछ लोग दम तोड़ चुके थे। इसी बीच जब बचाव कर्मियों ने मां की गोद से तेजस को सुरक्षित बाहर निकाला, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। दर्द से जूझ रही मां के चेहरे पर एक ही सुकून था—उसका बच्चा सुरक्षित था।
