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बिलासपुर: गोविंद सागर झील बन रही डंपिंग साइट, चेतावनी बोर्ड के बावजूद खुलेआम फेंका जा रहा मलबा

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बिलासपुर, 22 जनवरी। प्रदेश की प्रमुख जल संरचनाओं में शामिल गोविंद सागर झील में पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। चेतावनी बोर्ड लगे होने के बावजूद झील में दिन-दहाड़े मिट्टी और मलवा डंप किया जा रहा है। लुहणू स्थित स्टेडियम के समीप ट्रैक्टरों के माध्यम से सीधे झील के किनारे से मिट्टी गिराने की शिकायतें सामने आई हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधि लंबे समय से जारी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसकी जानकारी तक नहीं है। झील में लगातार मिट्टी डाले जाने से इसके प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंच रहा है और भविष्य में इसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार झील में मिट्टी जमा होने से गाद की मात्रा बढ़ेगी, जिससे जल धारण क्षमता घटेगी और पानी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि झील पर निर्भर आजीविकाओं पर भी संकट गहरा सकता है।

गोविंद सागर झील में बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन किया जाता है। वर्तमान में यहां 44 मत्स्य सहकारी सभाएं कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 2800 मछुआरे सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। झील में हो रही मिट्टी डंपिंग से मछलियों के प्राकृतिक आवास को खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गाद बढ़ने से पानी में ऑक्सीजन का स्तर घट सकता है, जिससे मछलियों की वृद्धि और प्रजनन प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसका सीधा असर मत्स्य उत्पादन और मछुआरों की आजीविका पर पड़ेगा।

गौर करने वाली बात यह है कि एक ओर मत्स्य पालन विभाग झील में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से 100 एमएम आकार का मछली बीज डाल रहा है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी डंपिंग जैसी गतिविधियां इन प्रयासों को कमजोर कर रही हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि झील के संरक्षण पर सख्ती से ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसे प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे।

स्थानीय नागरिकों, मछुआरों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि गोविंद सागर झील में हो रही अवैध मिट्टी डंपिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस संबंध में पवन शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिलासपुर ने कहा, “मामला हमारे ध्यान में आ गया है। संबंधित स्थल का निरीक्षण किया जाएगा और मिट्टी डंप करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

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