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HRTC में दोहरा कानून! 3420 के टांके पर मेहरबानी, 205 में निलंबन, यहां जानें

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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 18 जनवरी। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) में अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। निगम के दो अलग-अलग डिपो से जुड़े मामलों में कार्रवाई का तरीका पूरी तरह अलग नजर आ रहा है, जिससे निगम प्रबंधन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

सूत्रों के अनुसार पहला मामला किन्नौर जिले के रिकांगपिओ डिपो से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार 26 सितंबर 2025 को दिल्ली से रिकांगपिओ जा रही बस में फ्लाइंग स्क्वायड ने कंडक्टर सुरेश कुमार को 3420 रुपये के टांके (बिना टिकट राशि) के साथ पकड़ा था। आरोप है कि इतने बड़े वित्तीय अनियमितता के बावजूद करीब पांच महीने बीत जाने के बाद भी संबंधित कंडक्टर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, और वह आज भी निगम में सेवाएं दे रहा है।

इस मामले में बाद में यह तर्क दिया गया कि उक्त राशि दिल्ली से आने वाले कथित "सामान” से संबंधित थी, जिसे रिकांगपिओ के अड्डा इंचार्ज सुमन कुमार का बताया गया। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि संबंधित अड्डा इंचार्ज को निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है और इसी कारण जांच को प्रभावित किया गया। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर हुई इंक्वायरी में लीपापोती की गई और मैनेजर की रिपोर्ट भी सवालों के घेरे में है।

वहीं दूसरी ओर धर्मशाला डिपो से जुड़े एक अन्य मामले में होशियारपुर–धर्मशाला रूट पर तैनात कंडक्टर ऋषभ कुमार को फ्लाइंग स्क्वायड ने मात्र 205 रुपये के टांके में पकड़ा। आरोप है कि इस मामले में तुरंत निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।

दोनों मामलों की तुलना करने पर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों और पेंशनरों का कहना है कि जहां एक ओर दिन-रात काम करने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा और पेंशनरों को पेंशन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कथित भ्रष्टाचार के मामलों में चुनिंदा लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है।

क्या HRTC में नियम सभी के लिए समान नहीं हैं?
बड़ी रकम के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
निगम प्रबंधन पर किसका दबाव है, जो कार्रवाई से हाथ खींचे हुए है?

इस पूरे प्रकरण ने HRTC में भ्रष्टाचार, सिफारिश और दोहरे मापदंड को लेकर बहस छेड़ दी है। अब निगाहें निगम प्रबंधन और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि क्या इन मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी या फिर सवाल यूं ही हवा में तैरते रहेंगे।

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