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धर्मशाला छात्रा मौत मामला उलझा, क्लासमेट ने खोले कई राज, क्या झूठ बोल रहा प्रबंधन

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न्यूज अपडेट्स 
कांगड़ा, 04 जनवरी। देश के कांगड़ा जिला स्थित धर्मशाला कॉलेज छात्रा मौत में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। जिसके बाद इस मामले में कई एंगल बदलते दिखाई दे रहे हैं। पल्लवी मौत मामले में पुलिस ने छात्राओं पर लगाए रैगिंग आरोप पर जांच की और आरोपी क्लासमेट छात्रा से रैगिंग मामले में पूछताछ की। पुलिस के सामने आरोपी छात्रा ने कुछ ऐसे फेक्ट्स सामने रखे हैं, जिसके बाद से कॉलेज प्रबंधन भी सवालों के घेरे में आ गया है। 

आरोपी छात्रा ने पुलिस की पूछताछ में बताया है कि पल्लवी की रैगिंग हुई है। मगर, उसकी रैगिंग उसने नहीं, बल्कि थर्ड इयर की एक सीनियर लड़की ने की थी। जिसकी जानकारी आरोपी प्रोफेसर अशोक कुमार और पल्लवी के सभी क्लासमेंट को थी।

वहीं, दूसरी तरह कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि कॉलेज में इस तरह की कोई घटना हुई ही नहीं थी। रैगिंग केस में कॉलेज के सभी रिकॉर्ड साफ है। अब पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए मृतक छात्रा की फर्स्ट ईयर कक्षा के सभी छात्र-छात्राओं से पूछताछ का फैसला लिया है।

इसके लिए कॉलेज से संबंधित पूरा रिकॉर्ड जब्त कर लिया गया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्लासरूम या कॉलेज कैंपस में ऐसी कौन सी घटना हुई थी, जिसके बाद छात्रा गहरे डिप्रेशन में चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। वहीं, पुलिस अब इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है और कथित सीनियर छात्रा की पहचान में जुटी है।

दूसरी ओर, धर्मशाला डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल राकेश पठानिया ने कहा है कि कॉलेज की एंटी रैगिंग और सेक्सुअल हैरसमेंट कमेटी के पास इस तरह की कोई शिकायत कभी दर्ज नहीं हुई। 

प्रिंसिपल पठानिया ने यह भी स्पष्ट किया कि मृतक छात्रा 29 जुलाई के बाद कॉलेज की छात्रा नहीं थी। हालांकि, इसी बिंदु पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या छात्रा के कॉलेज छोड़ने के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है। पुलिस अब 29 जुलाई से पहले की घटनाओं पर विशेष फोकस कर रही है।

मामले में FIR दर्ज होने के महज 48 घंटे के भीतर आरोपी प्रोफेसर को कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई थी। जमानत के बाद प्रोफेसर द्वारा मीडिया में दिए गए बयानों पर मृतका के परिवार ने आपत्ति जताई है। परिजनों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी से जांच प्रभावित हो सकती है।

पुलिस अब मामले में तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल करने की तैयारी में है। मृतका और आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सोशल मीडिया चैट खंगाली जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या छात्रा को कॉलेज के बाहर भी मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि मृतका जिस बीमारी और डिप्रेशन से जूझ रही थी, उसका सीधा संबंध किसी कॉलेज संबंधित घटना से था या नहीं।

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