न्यूज अपडेट्स
बिलासपुर, 27 दिसंबर। हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। बिलासपुर एम्स (AIIMS) ने दिल के मरीजों के लिए दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक मंगवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब यहाँ ‘डायमंड ड्रिल’ (Diamond Drill) से बंद नसों को खोला जाएगा। यह मशीन दिल की धमनियों में जमे पत्थर जैसे सख्त कैल्शियम को काट देती है। इस ने हजारों मरीजों को राहत की सांस दी है। अब गंभीर इलाज के लिए उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
असली हीरे से होगी नसों की सफाई
इस नई मशीन को रोटेशनल एथेरेक्टॉमी सिस्टम कहा जाता है। आम भाषा में इसे डायमंड ड्रिल कहते हैं। यह किसी बारीक ड्रिल मशीन की तरह काम करती है। इसके अगले हिस्से पर असली हीरे के कण लगे होते हैं। हीरा दुनिया का सबसे कठोर पदार्थ है। यह नसों के अंदर जमे सख्त कैल्शियम को आसानी से घिस देता है। यह ड्रिल 1.5 लाख से 1.8 लाख चक्कर प्रति मिनट की तूफानी रफ्तार से घूमती है। यह चिकित्सा क्षेत्र में एक क्रांति समान है। यह मशीन ब्लॉकेज को पीसकर पाउडर बना देती है और नसों की कोमल दीवारों को नुकसान नहीं पहुंचाती।
बिना चीर-फाड़ के होगा सफल इलाज
यह इलाज पूरी तरह से सुई के जरिए किया जाता है। इसमें मरीज के शरीर पर कोई बड़ा कट या चीरा नहीं लगता है। जिन मरीजों के लिए पहले ओपन हार्ट सर्जरी ही एकमात्र रास्ता था, अब उनका इलाज एक छोटे से छेद से संभव होगा। इस तकनीक के आने से Himachal News में स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर ऊंचा उठेगा। पहले इस इलाज के लिए मरीजों को बाहरी राज्यों में जाना पड़ता था। अब उन्हें अपने ही प्रदेश में यह विश्वस्तरीय सुविधा मिलेगी।
बुजुर्गों के लिए वरदान और सस्ता इलाज
उम्रदराज मरीजों में धमनियों में कैल्शियम जमने की समस्या ज्यादा होती है। यह मशीन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। नसों से कैल्शियम साफ होने के बाद स्टेंट (छल्ला) अपनी जगह पर सही बैठता है। इससे भविष्य में दोबारा ब्लॉकेज का खतरा बहुत कम हो जाता है। एम्स बिलासपुर में यह सुविधा निजी अस्पतालों के मुकाबले बहुत कम कीमत पर मिलेगी। यह मशीन हार्ट सर्जरी यूनिट की दिशा में एक मजबूत कदम है।
