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धर्मशाला, 29 नवंबर। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल माफिया पर शिकंजा कसने के लिए कठोर कानून लागू कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद ‘लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम, 2025’ आज से प्रभावी हो गया है। यह विधेयक विधानसभा के मानसून सत्र में पारित किया गया था और अब इसकी अधिसूचना भी राजपत्र में जारी हो चुकी है।
नए कानून में कड़े दंड का प्रावधान
राज्य में पिछले कुछ वर्षों में बार-बार पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा माफिया की सक्रियता बढ़ने के बाद सरकार ने कानूनी कार्रवाई को सख्त करने का फैसला लिया। नए कानून के अनुसार, नकल करने या करवाने वाले को न्यूनतम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की कैद होगी। ऐसे मामलों को गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। दोषी पाए जाने पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
सेवा प्रदाताओं पर भारी शिकंजा
परीक्षा आयोजित करने में शामिल सेवा प्रदाता यदि किसी भी स्तर पर नकल या पेपर लीक में संलिप्त पाए जाते हैं, तो उनके लिए भी कठोर दंड तय किया गया है, तो एजेंसी पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
परीक्षा संचालन का पूरा खर्च भी संबंधित सेवा प्रदाता से वसूला जाएगा। दोषी एजेंसी को चार साल तक किसी भी सरकारी परीक्षा के संचालन से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। यदि कंपनी के निदेशक, कर्मचारी या स्टाफ सीधे तौर पर आरोपी पाए जाते हैं, तो उन्हें 3 से 10 साल तक की सजा हो सकती है।
पेपर लीक घटनाओं के बाद लिया गया बड़ा फैसला
नए कानून के तहत जांच की जिम्मेदारी डीएसपी स्तर के अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इसके अलावा, राज्य सरकार जरूरत महसूस होने पर किसी भी विशेष या केंद्रीय जांच एजेंसी को मामला सौंप सकती है।
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग, हमीरपुर में पेपर लीक के कई मामलों के उजागर होने के बाद सरकार ने आयोग को भंग कर दिया था। इसके बाद परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह मजबूत करने और माफिया पर लगाम लगाने के लिए यह नया कानून लाया गया है। हाल ही में आयोग का पुनर्गठन किया गया है और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।
