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बिलासपुर, 18 नवंबर। ग्राम पंचायत कुड्डी में वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज करवाई गई एफआईआर को लेकर क्षेत्र में भारी रोष फैल गया है। यह मामला श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की कमी के चलते एक सूखा पेड़ काटने से जुड़ा है।
ग्राम पंचायत कुड्डी के पूर्व प्रधान प्रेम लाल ठाकुर ने बताया कि पिछले दो महीनों में गांव में चार लोगों की मृत्यु हुई है। लगातार हो रही मौतों के कारण श्मशान घाट के लिए लकड़ी की कमी पड़ गई थी। पूर्व प्रधान के अनुसार, बीते महीने दो अंतिम संस्कार के दौरान हालात ऐसे बने कि लकड़ी कम पड़ने लगी। मजबूरी में ग्रामीणों ने अपनी ही मालकियत भूमि से सटी जगह पर खड़े एक सूखे पेड़ को काटा, ताकि दाह-संस्कार पूरा किया जा सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने इस मानवीय परिस्थिति को समझने के बजाय उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। उनका कहना है कि इससे पहले भी एक सूखा पेड़ गिरने या काटे जाने का आरोप भी जबरन ग्रामीणों पर ही लगा दिया गया था, जिससे अब गांव में तीखी नाराज़गी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि अंतिम संस्कार जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य में भी सहयोग नहीं मिलेगा और उल्टा कार्रवाई की जाएगी, तो यह सरासर अन्याय है।
ग्रामीण अब इस मामले को उपायुक्त बिलासपुर के समक्ष उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी मांग है कि श्मशान घाट के लिए लकड़ी की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद न पैदा हों।
15 खैर के पेड़ अवैध रूप से काटकर बेचने का आरोप, वन विभाग ने करवाई शिकायत दर्ज
इसी बीच बरमाणा थाना क्षेत्र में वन विभाग ने खैर के पेड़ों की अवैध कटान और बिक्री का मामला भी दर्ज करवाया है। वन परिक्षेत्र अधिकारी नरेंद्र सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि मनोहर लाल, निवासी गांव कुड्डी, ने प्रेमलाल के कहने पर अन्य स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कुड्डी जंगल व डीपीएफ बरयांस क्षेत्र से अवैध रूप से 15 खैर के पेड़ों को काटकर किसी निजी ठेकेदार को बेच दिया है।
पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों से जुड़े पहले मामले को लेकर क्षेत्र में विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं खैर के अवैध कटान का मामला अलग से गंभीर वन अपराध के रूप में सामने आया है।
