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मंडी, 01 अगस्त। (अनिल) आपदा की घड़ी में जब रास्ते बंद हो जाते हैं, तब कुछ ऐसे हीरो सामने आते हैं जो रास्ते नहीं, बल्कि उम्मीदों की राह खोलते हैं। ऐसा ही एक नाम है ज़िलाधीश मंडी अपूर्व देवगन का, जिन्होंने सिराज क्षेत्र की भीषण आपदा के दौरान अपनी कुर्सी छोड़कर खुद धरातल पर उतरकर वह कर दिखाया जो शायद ही किसी अधिकारी ने किया हो।
सिराज क्षेत्र की आपदा से प्रभावित गांवों में जब लोग बेसहारा थे, तब अपूर्व देवगन ने घंटों तक पैदल चलकर पहाड़ी रास्तों से होकर न सिर्फ गांवों तक पहुँचना सुनिश्चित किया, बल्कि हर पीड़ित की आंख में झांककर उनका दर्द समझा। आंखों में आंसू आए — लेकिन वे रुके नहीं, थके नहीं। उन्होंने कहा, "जब लोग अपने घरों में सुरक्षित नहीं हैं, तो मेरा कार्यालय वहीं है जहाँ उनका दर्द है।"
जहाँ बाकी लोग हेलीकॉप्टरों और रिपोर्टों पर निर्भर थे, वहां डीसी देवगन झोला उठाकर खुद लोगों के बीच पहुंचे। किसी बुजुर्ग की टूटी छत देखी, तो किसी मां की खोई उम्मीदें। पर हर जगह वे एक ही भावना लेकर गए सेवा, संवेदना और समाधान।
उनकी इस जनसेवा-भावना और मसीहा जैसे प्रयासों ने मंडी जिले में प्रशासन के प्रति विश्वास को एक नई ऊंचाई दी है। न केवल राहत सामग्री के वितरण में पारदर्शिता और गति आई, बल्कि उनकी उपस्थिति ने हर ग्रामीण को यह अहसास दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है और खुद चलकर आई है।
अपूर्व देवगन आज सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक प्रतीक बन चुके हैं उस भारतीय प्रशासनिक सेवा के, जो "जन" से जुड़ी है और "सेवा" को ही अपना धर्म मानती है।