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बिलासपुर, 04 जुलाई। भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत बध्यात टनल निर्माण में लापरवाही से प्रभावित ग्रामीणों की आवाज अब हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय तक पहुंच गई है। जनहित याचिका को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए रेल मंत्रालय और राज्य सरकार सहित सात अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है।
याचिका में कहा गया है कि बिलासपुर जिले के श्री नयना देवी जी विधानसभा क्षेत्र के कोट और तुन्नू गांवों में पिछले चार वर्ष से लगभग 25 परिवार टनल निर्माण के कारण अपने घरों में आई दरारों से भयभीत हैं। वहीं, अब सदर विधानसभा क्षेत्र की नोग और बामटा पंचायतों के करीब 20 से अधिक बीपीएल और अनुसूचित जाति के परिवारों के घरों में भी हाल ही में गंभीर दरारें आई हैं।
अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजनीश शर्मा ने कोर्ट को बताया कि इन परिवारों ने बीते एक वर्ष में जिला प्रशासन और निर्माण कंपनियों को कई बार लिखित में शिकायत दी, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ नहीं मिला। विस्थापन और पुनर्वास नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे प्रभावित परिवारों की सुरक्षा खतरे में है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की डबल बेंच ने रेल मंत्रालय, उत्तर 1 रेलवे, रेलवे विकास निगम लिमिटेड, मेसर्स मैक्स इंफ्रा, दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड, उपायुक्त बिलासपुर और उपमंडल अधिकारी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि प्रभावित ग्रामीण एक महीने से क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं और जिला प्रशासन द्वारा की गई बैठकों का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। बध्यात टनल के बाहर 33वें दिन भी प्रभावितों का धरना जारी रहा।