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हिमाचल: 5 महीने बाद भी नहीं बन पाई कांग्रेस की कार्यकारिणी, संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाने पर फंसा पेच

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न्यूज अपडेट्स 
शिमला। कई बार घोषणाओं के बावजूद हिमाचल कांग्रेस की नई कार्यकारिणी भंग होने के 5 महीने बाद भी नहीं बन पाई है। इसका एक बड़ा कारण भाजपा की तर्ज पर राज्य कांग्रेस के संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाने को लेकर हॉलीलॉज और सीएम सुक्खू के खेमे में ठन गई है। 

कांग्रेस पार्टी के जानकार सूत्रों का कहना है कि हॉलीलॉज गुट नहीं चाहता कि पार्टी के संगठनात्मक जिलों की संख्या 13 से बढ़ाकर 17 की जाए। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के समर्थकों की दलील है कि प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक मॉडल की इस तरह से कॉपी करना फिजूल का काम है। वहीं इसकी पैरवी करने वाले सुक्खू खेमे का मानना है कि ऐसा करने से राज्य में कांग्रेस पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए उन्हें संगठन में और ज्यादा संख्या में जगह दी जा सकती है।

आलाकमान के हाथ बंधे

इस मसले पर कांग्रेस के दोनों गुटों में हो रही खींचतान ने पार्टी आलाकमान के हाथ बांध दिए हैं। कांग्रेस के करीबी सूत्रों का कहना है कि हिमाचल कांग्रेस की नई कार्यकारिणी के ऐलान में हो रही देरी के पीछे यही खास वजह है। इससे पहले पार्टी की हिमाचल प्रभारी रजनी पाटिल ने फरवरी में ऐलान किया था कि नई कार्यकारिणी का ऐलान 15 दिन में कर दिया जाएगा। लेकिन एक माह बीतने के बाद भी अभी इसका ऐलान नहीं हो पाया है। अब अहमदाबाद में कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन 8 अप्रैल को होना है और इसमें सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू समेत प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता भाग लेंगे। लेकिन जिलाध्यक्षों के नाम अभी तक तय नहीं हैं।

गुटबाजी ने चिंता में डाला 

सीएम सुक्खू केरल रवाना होने से पहले बीते दिनों दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल से मिले थे। उससे पहले ही प्रतिभा सिंह ने भी पाटिल से मुलाकात कर संगठनात्मक जिलों की संख्या को लेकर अपना पक्ष रखा था। लेकिन पार्टी के दोनों गुटों के बीच इस मसले पर एक राय नहीं होने से आलाकमान दबाव में आ गया है।

इससे पहले पार्टी आलाकमान ने हिमाचल कांग्रेस की नई कार्यकारिणी के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट का वरीयता देने का निर्णय लिया था। पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को पहले ही सौंप दी थी। अब नए सिरे से दबाव बनने से आलाकमान भी इस पसोपेश में है कि पार्टी में संगठनात्मक बदलाव का अधिकार राज्य संगठन के ही हाथ जाता दिख रहा है, जो कि हिमाचल कांग्रेस के कई नेताओं में मायूसी का कारण बन सकता है। 

पार्टी कार्यकर्ता निराश

इस खींचतान का असर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ रहा है, साथ ही उनका लोगों से सीधा संवाद भी प्रभावित हो रहा है। इस साल के अंत में होने वाले राज्य के पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस की यह स्थिति कांग्रेस की संभावनाओं को कमजोर करने वाली साबित हो सकती है।

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