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जज न तो कहीं के राजकुमार है ना ही संप्रभु, जज का काम सेवा देना : CJI

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CJI DY Chandrachud News: देश के मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चंद्रचूड़ ने ब्राजील में शिखर सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में कहा कि जज न तो कहीं के राजकुमार हैं और न ही संप्रभु। जज का काम सेवा देना होता है। जज सार्वजनिक पद पर बैठा ऐसा पदाधिकारी है जो अवमानना के लिए दोषी को दंडित करता है और दूसरे के जीवन पर महत्वपूर्ण निर्णय लेता है। इसलिए उसके फैसले और निर्णय लेने के रास्ते पारदर्शी होने चाहिए।

ब्राजील के रियो डी जनेरियो में शिखर सम्मेलन में अपनी बात रखते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक न्यायाधीश का निर्णय और उस फैसले तक पहुंचने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। वह सभी को एक साथ चलने वाला होना चाहिए। 

सीजेआई ने कहा कि “आज हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बातचीत कर रहे हैं। एआई की मदद से यूं ही कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है क्योंकि इसका स्पष्टीकरण होना चाहिए कि इस तरह का फैसला क्यों और किस आधार पर लिया गया, यह जानना ही चाहिए। जज के रूप में, हम न तो कहीं के राजकुमार हैं और न ही संप्रभु जो किसी भी फैसले के स्पष्टीकरण को दरकिनार कर दें। हम सेवा करने वाले लोग हैं और लोगों के अधिकारों की रक्षा करने वाले समाज के प्रवर्तक हैं।”

सीजेआई ने आगे कहा, एक जज का निर्णय और उस तक पहुंचने का रास्ता पारदर्शी होना चाहिए। जज का फैसला कानून की पढ़ाई करने वाले और आम लोगों की समझने योग्य होना चाहिए। जज की हमेशा यही कोशिश होनी चाहिए कि वह सभी के लिए एक साथ चलने के लिए हो। दुनिया भर की न्यायिक प्रणालियों में प्रौद्योगिकी की भूमिका के बारे में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायिक प्रक्रियाओं में नवीनता और पारदर्शिता होनी चाहिए।

सीजेआई चंद्रचूड़ ने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी ने कानून और समाज के बीच संबंधों को मौलिक रूप से बदल दिया है। उदाहरण के रूप जहां प्रौद्योगिकी न्याय की पहुंच न सिर्फ बढ़ा सकती है, उनमें सुधार के लिए पूर्व में लिए गए निर्णयों को भी सामने रख सकती है।  प्रोद्योगिकी का उदाहरण देते हुए सीजेआई ने कहा कि 750,000 से अधिक मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई है, और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों को YouTube पर लाइव-स्ट्रीम भी किया गया।

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