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विभूति हत्या कांड : 90 पन्नों का वह सुसाइड नोट बयां कर रहा विभूति के दर्द की दास्तां, सास - ससुर और पति हत्या के जिम्मेदार, तीनों को मिले सजा

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चंडीगढ़/कुल्लू 27 अप्रैल - साल भर पहले सुंदरनगर (हिमाचल प्रदेश)  से दुल्हन बनकर चंडीगढ़ आई विभूति बीते दो महीने से हर रोज तिल तिल कर मर रही थी। यह खुलासा विभूति की डायरी में मिले सुसाइड नोट से हुआ है। डायरी में मिले 90 पन्ने उसके साथ हो रही ज्यादती की  दास्तां को बयां कर रहे है। डायरी के अंतिम 10 पन्नों में विभूति ने पति की करतूतों से सास ससुर तक को न बख्शने की अपील की है। सुसाइड नोट में उसने पति के चरित्रहीन होने और शादीशुदा होने के बावजूद मोबाइल फोन पर वैश्याओं को तलाशने की बात कही है। साथ ही गर्भ के दौरान आरोपी  पति द्वारा गला दबाकर मारपीट करने और लगातार प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। 

पुलिस ने विभूति की डायरी को कब्जे में लेकर उसकी लिखावट की जांच करवाने के लिए सीएफएसएल को भेज दिया है। मामले को गहनता से जांच की जा रही है। आईटी पार्क थाना क्षेत्र के सुभाष नगर में बीते 22 अप्रैल को 28 वर्षीय विभूति शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले ने पुलिस ने अगले दिन केस दर्ज कर आरोपी पति सुमित शर्मा और ससुर सतपाल शर्मा को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद आईटी पार्क थाना पुलिस ने आरोपियों के घर में तलाशी ली तो विभूति की डायरी मिली। डायरी को पढ़ने पर पता चला कि विभूति ने जनवरी 2023 से इसमें लिखना शुरू किया था। जनवरी माह में एक दो दिन लिखने के बाद उसने लिखना बंद कर दिया । 

फरवरी के मध्य से उसने रोजाना के दर्द को डायरी में लिखना शुरू किया। उसने पति पर आरोप लगाते हुए लिखा है कि  मैं इतनी मुश्किल से गर्भवती हुई थी इसके बावजूद इसने मेरा गला दबाते हुए मारपीट की, जिसमे इसके मां बाप ने भी साथ दिया। इसके फोन में हमेशा प्रॉस्टिट्यूट सर्च हुआ मिलता है।

मेरा दिल, आत्मा शरीर सब चाहते हैं तीनों को मिले सजा'

विभूति ने मरने से पहले लिखे सुसाइड नोट में अपील करते हुए लिखा है कि 'लास्ट रिक्वेस्ट है कि इसके मां-बाप को इनोसेंट या ओल्ड एज होने के नाते छोड़ा न जाए। इंसान को उसके किए की सजा जरूर मिले, जो उन्होंने किया वह अब कोई छोटी बात नहीं है, इन्होंने किसी की लाइफ ली है। अपने लालच, अपनी गलत चीज के लिए इन्होंने मुझे यहां से निकालने की हर कोशिश की है क्योंकि इन दोनों को वह सब नहीं मिला जो इन्हें चाहिए था। काश! मुझ पर किसी ने विश्वास किया होता। मेरा मेडिकल भी हो कि मेरा चरित्र कितना लॉयल था। इफ पॉसिबल... मैंने कभी नहीं किया जो इन तीनों ने मेरे को डिफेम किया है। मुझे बोल-बोलकर परेशान कर दिया। 

मैंने अपनी हर चीज दो है इस घर को लेकिन इन्होंने मुझे मजबूर कर दिया। आज मेरा दिल, आत्मा, दिमाग, बाँडो, मेरी हर चीज चाहती है कि इन तीनों को वह सारी सजा मिले जो इन्होंने मेरे साथ किया है। इनको माफी नहीं मिले न कोई इनकी बचाए। यह सब कल किसी और के साथ भी यही करेंगे। किसी और की लाइफ बचा तो इनकी किसी बात पर

विश्वास करने से पहले देख लेना सच क्या था, क्या नहीं। मैं अब और सहन नहीं कर पाऊंगी। जिस-जिस ने मेरा साथ देने की कोशिश की. मेरे को समझा उनको थैंक यू मुझे पता है मुझे डिक्लेअर किया जाएगा कि मैं किसी बीमारी से डिप्रेस्ड थी, इसलिए मैंने ऐसा किया। ऐसा कुछ नहीं था, डिप्रेस्ड हर दूसरा बंदा है कुछ लोगों को दुनिया इतना मजबूर कर देती है कि ऐसा स्टेप ही लेना पड़े। मैं जो भी कर रही है वह इन तीनों की वजह से कर रही हूं।

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