दरअसल, 14 दिसंबर को सुंदरनगर में युवती से गैंगरेप के आरोपियों को को कोर्ट में पेश करने के लिए छह पुलिस जवान लेकर लाए थे. इसके बाद इन सभी को सेरी मंच पर धूप में बैठाकर परिजनों से मिलने दिया गया. इस दौरान परिजनों ने उनको खाना खिलाया, जबकि पुलिस जवानों ने परिजनों को रोका भी नहीं.
नियम के अनुसार, कोर्ट में पेश करने के दौरान आरोपियों को परिजनों से नहीं मिलने दिया जाता है और अगर खाना भी खिलाना हो तो पुलिस कर्मचारी अपनी निगरानी में उन्हें खाना खिलाते हैं. मामले के फोटो वायरल होने के चलते पुलिस पर सवाल उठे थे.
एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने मामला संज्ञान में आने पर एएसपी विवेक चैहल को जांच के आदेश दिए थे. एएसपी ने तीन दिन में जांच रिपोर्ट एसपी को सौंप दी थी. इसमें पुलिस कर्मचारी लापरवाही करने के दोषी पाए गए हैं. एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री का कहना है रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित पुलिस कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है. जवाब आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी.
जैंजहली में शिक्षा विभाग के क्लर्क का शव संदिग्ध हालात में मिला था. यहां पर शुरू में पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज नहीं किया था, जबकि परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी. बाद में मामले को लेकर काफी बवाल हुआ था. एसपी मंडी को खुद मौके पर जाना पड़ा था. उसके बाद मर्डर का केस दर्ज हुआ था. डीएसपी करसोग के खिलाफ लोगों में रोष था और बाद में उन्हें जांच से हटा दिया गया था.

