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कुल्लू, 08 सितंबर। सेब की फसल के सीजन में पतलीकूहल सब्जी मंडी से एक व्यापारी द्वारा लाखों रुपये का सेब लेकर बिना भुगतान किए फरार होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने आढ़तियों के साथ-साथ उन सैकड़ों बागवानों की चिंता भी बढ़ा दी है, जिनकी सालभर की मेहनत और आर्थिक उम्मीदें सेब की फसल पर टिकी होती हैं।
जानकारी के अनुसार, पतलीकूहल सब्जी मंडी में सेब का कारोबार करने वाले हरिंदर साहनी निवासी वैशाली, बिहार पर आढ़तियों का करीब 30 लाख रुपये का सेब लेकर भुगतान किए बिना फरार होने का आरोप है। मामले को लेकर पतलीकूहल सब्जी मंडी आढ़ती संघ की ओर से पुलिस थाना पतलीकूहल में शिकायत दर्ज करवाई गई है।बताया जा रहा है कि उक्त व्यापारी पिछले तीन-चार वर्षों से पतलीकूहल मंडी में कारोबार कर रहा था। इस सीजन में उसने कई आढ़तियों से सेब खरीदा, लेकिन भुगतान किए बिना अपना कमरा खाली कर फरार हो गया।
बताया जा रहा है कि उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है।आढ़तियों के अनुसार व्यापारी ने कुछ लोगों को भुगतान के लिए चेक भी दिए थे, लेकिन बैंक में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण भुगतान नहीं हो सका। इसके बाद व्यापारी के फरार होने से आढ़तियों के सामने आर्थिक नुकसान का संकट खड़ा हो गया है।
हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में सेब केवल एक फसल नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आर्थिक रीढ़ है। बागवान पूरे वर्ष बर्फबारी, बारिश, ओलावृष्टि, बीमारी और मौसम की चुनौतियों के बीच अपने बगीचों की देखभाल करते हैं। सेब की फसल वर्ष में केवल एक बार तैयार होती है और इसी फसल की बिक्री से कई परिवारों का पूरे वर्ष का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, बैंक की किस्तें, कृषि लागत और अन्य जरूरतें पूरी होती हैं।ऐसे में यदि मंडी में सेब बेचने के बाद उसका भुगतान समय पर न मिले तो इसका सीधा असर बागवानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। एक सीजन में हुई ऐसी घटना बागवान की कई महीनों की मेहनत और उसकी सालभर की आर्थिक योजना को प्रभावित कर सकती है।
आढ़ती संघ के अध्यक्ष कुंज लाल ठाकुर ने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच करने तथा आरोपी व्यापारी का पता लगाकर उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मंडी में कारोबार करने वाले व्यापारियों की विश्वसनीयता और भुगतान व्यवस्था को लेकर ठोस व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि भविष्य में बागवानों और आढ़तियों को इस तरह के आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े।
बागवानों का कहना है कि सेब का एक-एक पेटी केवल फल नहीं, बल्कि पूरे वर्ष की मेहनत, खर्च और उम्मीद लेकर मंडी तक पहुंचती है। इसलिए मंडियों में खरीद के बाद भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना और बागवानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
