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ऊना, 26 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश के परिवहन सुधारों में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने ऊना में राज्य के पहले ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADTT) का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उद्घाटन किया। लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह आधुनिक पार्क ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने स्वयं संभाली स्टीयरिंग, लिया ट्रैक का जायजा
उद्घाटन के बाद मुकेश अग्निहोत्री ने केवल फीता ही नहीं काटा, बल्कि स्वयं कार की स्टीयरिंग थामकर पूरे ट्रैक का ट्रायल लिया। उन्होंने सेंसर और कैमरों से लैस इस ट्रैक की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा। इस दौरान उन्होंने परिसर में पौधारोपण भी किया और संदेश दिया कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण का संतुलन भी अनिवार्य है।
अब सिफारिश नहीं, 'हुनर' से बनेगा लाइसेंस
उपमुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस तकनीक के आने से अब ड्राइविंग टेस्ट में मानवीय दखल पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उन्होंने इसके मुख्य लाभ गिनाए:
पारदर्शी प्रक्रिया: टेस्ट का परिणाम कंप्यूटर द्वारा तय किया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार के भेदभाव की गुंजाइश नहीं रहेगी।
प्रदेशवासी अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन स्लॉट बुक कर सकते हैं और तय समय पर आकर टेस्ट दे सकते हैं। केवल वही लोग लाइसेंस प्राप्त कर पाएंगे जो ड्राइविंग की कठिन कसौटियों पर खरे उतरेंगे, जिससे भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
प्रदेश में खुलेंगे 5 और ड्राइविंग पार्क
मुकेश अग्निहोत्री ने घोषणा की कि ऊना का यह प्रोजेक्ट एक मॉडल की तरह काम करेगा। इसकी सफलता को देखते हुए प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी 5 और ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बनाए जाएंगे। उन्होंने इस आधुनिक केंद्र की स्थापना के लिए परिवहन विभाग के अधिकारियों को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की।
तकनीक से लैस है नया पार्क
यह ट्रैक सेंसर, सीसीटीवी कैमरों और ऑटोमेटेड सिग्नलिंग सिस्टम से लैस है। जैसे ही वाहन चालक ट्रैक पर चलता है, उसके हर मूवमेंट को सेंसर रिकॉर्ड करते हैं। यदि चालक तय मानकों (जैसे 8 बनाना, रिवर्स पार्किंग या चढ़ाई पर गाड़ी रोकना) में विफल रहता है, तो कंप्यूटर तुरंत परिणाम घोषित कर देता है।
