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शिमला, 06 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन दिनों सांप्रदायिक तनाव और वैचारिक मतभेद का एक बड़ा मामला गरमाया हुआ है। विवाद की मुख्य वजह शिमला की प्रतिष्ठित 'सूद सभा' द्वारा संचालित राम मंदिर हॉल में एक मुस्लिम परिवार की बेटी का निकाह प्रस्तावित होना है। आगामी 11 अप्रैल को होने वाले इस निकाह को लेकर हिंदू संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया है और प्रशासन सहित सूद सभा को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है।
समिति का तर्क है कि मंदिर की पवित्रता और हिंदू समाज की आस्था से जुड़ी संपत्तियों का उपयोग किसी दूसरे धर्म के वैवाहिक या धार्मिक आयोजनों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। हिंदू संघर्ष समिति के दिग्गज नेताओं विजय शर्मा और मदन ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि यदि यह निकाह कार्यक्रम रद्द नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए 'सुअरों की बारात' निकालने और सामूहिक रूप से मुंडन करवाने जैसी बेहद तीखी चेतावनियाँ दी हैं, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है।
दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर सूद सभा के अध्यक्ष राजीव सूद ने बेहद संतुलित लेकिन दृढ़ रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सूद सभा हमेशा से ही सर्वधर्म समभाव की भावना के साथ कार्य करती रही है और देश का संविधान हमें किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव करने की अनुमति नहीं देता। राजीव सूद ने ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखते हुए बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है जब राम मंदिर हॉल में किसी मुस्लिम परिवार का निकाह हो रहा हो; बल्कि पिछले पाँच वर्षों के भीतर यहाँ 15 से अधिक निकाह संपन्न कराए जा चुके हैं और आज तक कभी किसी मर्यादा का उल्लंघन नहीं हुआ।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हॉल के कड़े नियम हैं जिनमें मांस, मदिरा और स्वच्छता को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाता। फिलहाल, विवाद के बढ़ते रुख को देखते हुए सूद सभा ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। अब पूरे शहर की नज़रें इस बैठक के फैसले पर टिकी हैं कि क्या शिमला में वर्षों से चला आ रहा यह आपसी भाईचारा बरकरार रहेगा या फिर विरोध प्रदर्शन की आग में शहर का माहौल बिगड़ेगा।
