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शिमला, 24 मार्च। हिमाचल प्रदेश की जनता को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर 5 रुपये प्रति लीटर तक ‘अनाथ और विधवा उपकर’ लगाने का फैसला किया है। इसको लेकर सरकार ने हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश कर पारित करवा लिया है।
विधानसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया और इसे पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता पर अतिरिक्त बोझ करार दिया, लेकिन सरकार ने बहुमत के आधार पर इसे पास करा लिया। अब इस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसके लागू होते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
विपक्ष का कहना है कि इस फैसले से राज्य में डीज़ल की कीमत 90 रुपये और पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच सकता है, जो पड़ोसी राज्यों से भी अधिक हो जाएगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हिमाचल में पहले ही पेट्रोल पर करीब 17 फीसदी और डीज़ल पर 13.9 फीसदी टैक्स लागू है, ऐसे में अतिरिक्त 5 रुपये का बोझ आम आदमी की कमर तोड़ देगा।
विपक्ष ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के बीच इस तरह का सेस लगाना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि सेस का नाम ‘अनाथ और विधवा’ रखा गया है।
इस फैसले के संभावित असर को लेकर विपक्ष ने चेतावनी दी कि इससे न केवल आम जनता बल्कि किसान, ट्रांसपोर्ट और पर्यटन क्षेत्र भी प्रभावित होंगे। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में इजाफा होगा, पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्य महंगे होंगे और सेब सहित कृषि उत्पादों की ढुलाई लागत बढ़ेगी। इसके अलावा बस किराए में भी वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।
विपक्ष का यह भी कहना है कि पड़ोसी राज्यों से सस्ता तेल मिलने के कारण लोग हिमाचल में ईंधन खरीदने से बचेंगे, जिससे राज्य को राजस्व नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार के इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए स्थायी आय का स्रोत तैयार कर रही है, लेकिन विपक्ष इसका भी विरोध कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पहले से ही पेट्रोल-डीजल पर करीब 27 रुपये का सेस ले रही है और हिमाचल में कीमतें अभी भी पंजाब और हरियाणा से कम रहेंगी। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि वह केंद्र सरकार से रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बहाल करने और सेस कम करने की मांग करे।
सरकार का दावा है कि इस नए सेस से प्राप्त होने वाली पूरी राशि अनाथ एवं विधवा वेलफेयर फंड में जमा की जाएगी और इसका उपयोग जरूरतमंदों की सीधी सहायता और कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार में किया जाएगा।
