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शिमला, 25 मार्च। (अनिल) हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में 422 बस रूटों के प्रस्तावित आवंटन से जुड़े मामले में 23 मार्च को सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दे दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि तब तक मामले में पहले से लगाई गई अंतरिम रोक जारी रहेगी।
यह मामला हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) द्वारा कथित रूप से सरेंडर किए गए 422 बस रूटों के पुनः आवंटन से जुड़ा है। इससे पहले कोर्ट ने रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटीज़ (आरटीए) की उस बैठक के एजेंडे पर रोक लगा दी थी, जिसमें इन रूटों को निजी ऑपरेटरों को देने का प्रस्ताव रखा गया था।
मामले की सुनवाई न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत में हो रही है। याचिका सोलन के जय मां शूलिनी निजी बस संचालक संघ द्वारा दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि परिवहन विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत 422 रूटों के पुनः आवंटन की प्रक्रिया नियमों के खिलाफ शुरू की गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2014 की ट्रांसपोर्ट पॉलिसी में निर्धारित 60:40 के अनुपात को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसके अलावा यह भी आरोप है कि जिन रूटों को एचआरटीसी द्वारा सरेंडर बताया जा रहा है, वे स्थायी रूप से स्वीकृत नहीं थे और निगम उन्हें अस्थायी परमिट के आधार पर चला रहा था।
संघ ने यह भी दावा किया है कि एचआरटीसी ने इन रूटों के परमिट औपचारिक रूप से परिवहन विभाग में जमा नहीं किए, फिर भी उन्हें सरेंडर दिखाकर दोबारा आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई।
