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नई दिल्ली, 12 मार्च। अक्सर हम अपने मां-बाप को कहते हुए सुनते हैं कि हमारी उम्र भी हमारी संतान को लग जाए. मां-बाप अपनी संतान के लिए हर संभव प्रयास करते हैं लेकिन गाजियाबाद में एक ऐसा बेबस पिता है जिसने अपनी संतान के लिए हर संभव कोशिश की. घर तक बेच दिया तमाम जमा पूंजी लुटा दी. अपनी जवानी इस उम्मीद में गुजार दी की एक दिन बेटा ठीक हो जाएगा लेकिन जब वो पूरी तरह से टूट गया तो उसने सुप्रीम कोर्ट से अपने बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग की. ये कहानी है हरीश राणाकी. जिसकी कहानी सुन हर किसी का दिल आज भारी है.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इच्छा मृत्यु की मांग को स्वीकार कर लिया है.
"हम न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और बेटे के इलाज के दौरान सहयोग उपलब्ध कराने वाले चिकित्सकों का धन्यवाद करते हैं. कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के बोर्ड ने बेटे का स्वास्थ्य परीक्षण किया और ब्रेन डेड होने की पुष्टि की. 13 जनवरी के दौरान न्यायाधीश ने हमें अपने समकक्ष बुलाया. हमारी न्यायाधीश के साथ गोपनीय मीटिंग हुई."-अशोक राणा, हरीश राणा के पिता
आंखों में आंसू लिए अशोक राणा ने आगे कहा, "यह अकेला हरीश राणा का मामला नहीं है देश में हरीश राणा की तरह हजारों बेटे बिस्तर पर हैं. हम चाहते हैं सबका भला हो. हमने जज साहब के सामने अपनी बात रखी. कोर्ट ने आज जो निर्णय सुनाया है वह केवल हरीश राणा का फैसला नहीं है बल्कि इस निर्णय से मेरे जैसे सैकड़ो पिता को हौसला मिलेगा."
अशोक राणा ने कहा, "हमारा बेटा हरीश राणा भले ही 13 साल से बिस्तर पर है लेकिन फिर भी हम प्रतिदिन उसकी फिजियोथैरेपी करते हैं. न्यायपालिका ने हमारे बेटे को कई प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जिसके लिए हम न्यायपालिका का धन्यवाद करते हैं. हम जो चाह रहे थे हमारी इच्छा अनुसार न्यायपालिका ने फैसला सुनाया है।
राणा ने आगे कहा, "अनुभवी चिकित्सकों की देखरेख में एम्स में बेटे हरीश राणा को रखा जाएगा इसके बाद फूड पाइप को हटाया जाएगा. स्वर्गवास होने के बाद पार्थिव शरीर को बहुत ही सम्मान के साथ लाया जाएगा."
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन इलाके में रहने वाले हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट से बेटे को इच्छा मृत्यु देने की मांग की थी जिसकी सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है. जब हम हरीश राणा से बातचीत करने के लिए राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर सोसाइटी में पहुंचे तो बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा हुआ था. समिति के गार्ड ने कहा कि जब तक अनुमति नहीं मिलेगी अंदर नहीं जाने दिया जा सकता. हमने अशोक राणा तक पहुंचाने की काफी कोशिश की. समिति की सिक्योरिटी द्वारा बताया गया कि वह मीडिया से कल बात करेंगे.
राज एम्पायर सोसाइटी के रहने वाले एच पी शर्मा ने बताया, हरीश राणा और उनके परिवार राज अंपायर सोसाइटी में रहते हैं. हरीश अपने फ्लैट में ही मौजूद है. कुछ दिन पहले हरीश राणा के पिता अशोक राणा जिक्र कर रहे थे कि अगर इच्छा मृत्यु की अनुमति का समाचार मिलता है तो मैं उसे पर खुशी मनाऊं या फिर दुखी हूं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा. अशोक राणा ने अपने बेटे को संभालने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन अब ढलती उम्र में उनके सामने बड़ी चुनौती थी कि उनके बाद बेटे का ख्याल कौन रखेगा. अशोक राणा प्रतिदिन आसपास के क्रिकेट स्टेडियम में जाकर रिफ्रेशमेंट आइटम बेचा करते हैं.
एक अन्य सोसाइटी निवासी आनंद पुष्कर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अशोक राणा के परिवार से मुलाकात हुई है. साथ में समिति के दो-तीन लोग भी मिलने गए थे. सोसाइटी निवासियों द्वारा भी हर संभव सहयोग और सहायता की गई लेकिन अब किसी के पास कोई विकल्प नहीं बचा है. अशोक राणा का परिवार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर जहां एक तरफ राहत देने वाला मान रहा है तो वहीं दूसरी तरफ परिवार गहरे दुख में है.
2013 में हुआ था हादसा
अशोक राणा के पुत्र हरीश राणा 2013 में चंडीगढ़ की निजी विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे. बॉडीबिल्डिंग का भी काफी शौक था. पढ़ाई के साथ-साथ बॉडीबिल्डिंग भी किया करते थे और विभिन्न बॉडीबिल्डिंग कंपीटीशन में पार्टिसिपेट भी करते थे. लेकिन अचानक 20 अगस्त 2013 के बाद हरीश राणा की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई. अचानक अशोक राणा को फोन आता है की हरीश अस्पताल में भर्ती हैं. पिता को बताया जाता है की चौथी मंजिल से हरीश राणा नीचे गिर गए हैं जिसके चलते उनके सिर में गंभीर चोटे आई हैं.
ठीक होने की उम्मीदें शून्य-डॉक्टर्स
20 अगस्त 2013 के बाद से लगातार हरीश राणा की हालत खराब होती चली गई. हरीश राणा के परिवार ने चंडीगढ़ पीजीआई से लेकर दिल्ली एम्स और देश के कई बड़े प्राइवेट अस्पतालों में उनका इलाज कराया लेकिन कोई फायदा नहीं मिला. अंत में डॉक्टरों ने हरीश के पिता अशोक राणा को साफ कह दिया कि दिमाग में चोट लगने से नशे सूख गई है और अब ठीक होने की उम्मीद शून्य है. लेकिन अशोक राणा ने उम्मीद नहीं छोड़ी और फिर भी इलाज जारी रखा. पिछले 13 सालों से हर्ष परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में है. हर्ष बिस्तर पर ही रहते हैं ना ही हर्ष को कोई चीज महसूस होती है और ना ही चल बोल सकते हैं. शरीर में किसी तरह का बीते 13 सालों से कोई मूवमेंट नहीं है कभी कबार परिवार को हर्ष पलक झपकते हुए जरूर दिखाई देते हैं।
जिंदगी भर की कमाई बेटे पर लगाई
हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने अपनी जिंदगी भर की कमाई बेटे पर लगा दी. परिवार दिल्ली में रहता था सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन जब से बेटे की हालत खराब हुई परिवार की आर्थिक स्थिति ढलती चली गई. अशोक राणा का दिल्ली में अपना घर था और दिल्ली के एक प्रतिष्ठित पांच सितारा होटल में नौकरी करते थे. बेटे के इलाज के लिए हरीश राणा ने अपना दिल्ली का घर बेच दिया और गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर में फ्लैट लेकर रहने लगे. ₹4000 पेंशन में गुजारा करना मुश्किल था तो अशोक राणा ने छोटे-मोटे काम किया ताकि बेटे के इलाज का खर्च चलता रहे. पिछले 13 सालों में परिवार हर्ष राणा के इलाज पर 50 लाख रुपए से अधिक खर्च कर चुका है।
हरीश राणा के पिता अशोक राणा और मां निर्मला राणा को उम्मीद थी कि एक दिन बेटा जरूर ठीक होगा लेकिन इस उम्मीद के साथ 13 साल गुजर गए लेकिन हालात जस के तास रहे. गुजरते वक्त के साथ हरीश राणा और निर्मला राणा भी बूढ़े होते चले गए. पति पत्नी को डर सताने लगा कि उनके बाद बेटे का ख्याल कौन रखेगा. इसी डर को लेकर अशोक राणा ने 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की अपील की. लेकिन 2024 में हाई कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया।
15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 32 साल के हरीश राणा के परिवार की उसे अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसमें लगभग 13 साल से वेजिटेटिव स्टेट में रहने वाले लाइव सपोर्ट को हटाने की मांग की गई थी. 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी है।
