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शिमला, 07 फरवरी। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बसों में ड्यूटी कर रहे परिचालकों को रोजमर्रा के कामकाज के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी कड़ी में शिमला के एक बस स्टॉपेज पर शुक्रवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिमला के एक बस स्टॉपेज से करीब 60–65 वर्ष का एक व्यक्ति HRTC बस में सवार हुआ। जब परिचालक ने टिकट बनाने के लिए उससे संपर्क किया, तो उसने स्वयं को निगम का स्टाफ बताते हुए टिकट न लेने की बात कही। इस पर परिचालक ने नियमानुसार उससे आई-कार्ड दिखाने का अनुरोध किया।
व्यक्ति ने बताया कि उसका आई-कार्ड घर पर रह गया है। नियमों के अनुसार, बिना वैध पहचान पत्र के यात्रा करने पर टिकट लेना अनिवार्य होता है, इसलिए परिचालक ने उससे 10 रुपये का टिकट बनवाया, जिसे उसने अदा भी कर दिया।
इसके बाद बातचीत के दौरान उक्त व्यक्ति परिचालक से यह पूछने लगा कि वह कब से निगम में कार्यरत है और फिर उसका नाम जानने का प्रयास किया। परिचालक ने स्पष्ट किया कि उसने कोई गलत व्यवहार नहीं किया है और यदि किसी को कोई जानकारी चाहिए तो वह HRTC कार्यालय से संपर्क कर सकता है।
परिचालक का कहना है कि किसी भी यात्री या स्वयं को स्टाफ बताने वाले व्यक्ति से आई-कार्ड मांगना उनकी ड्यूटी का हिस्सा है और यह निगम के नियमों के तहत आवश्यक है। कर्मचारियों का मानना है कि नियमों का पालन कराने पर उन पर दबाव बनाना या सवाल उठाना अनुचित है।
इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ड्यूटी निभा रहे HRTC कर्मचारियों को अपने कर्तव्य के निर्वहन के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और सम्मान मिल रहा है या नहीं। कर्मचारियों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में निगम प्रशासन को उनके समर्थन में ठोस कदम उठाने चाहिए।
