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शिमला, 01 फरवरी। शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) अस्पताल के डॉक्टरों ने एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण और दुर्लभ मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। डॉक्टरों की टीम ने सिरमौर जिले के 55 वर्षीय व्यक्ति के गले से 15 दिनों से फंसी जिंदा जोंक को सुरक्षित रूप से बाहर निकालकर उसकी जान बचाई।
जानकारी के अनुसार सिरमौर जिले के रहने वाले सुरेश दत्त को बीते करीब दो सप्ताह से गले में कुछ फंसे होने का अहसास, आवाज में बदलाव और असहजता की शिकायत थी। प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें सोलन से आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया। यहां पल्मनरी विभाग के विशेषज्ञों ने ब्रोंकोस्कोपी जांच के माध्यम से गले में जोंक की सटीक स्थिति का पता लगाया।
जांच में सामने आया कि जोंक सांस की नली के बेहद नजदीक चिपकी हुई थी, जिससे मरीज को गंभीर खतरा बना हुआ था और उसे निकालना बेहद जोखिम भरा माना जा रहा था। इसके बावजूद पल्मनरी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. डिंपल के. भगलानी के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने पूरी सावधानी के साथ उपचार की योजना बनाई।
डॉक्टरों ने विशेष सक्शन तकनीक का प्रयोग करते हुए लगभग 20 मिनट में काली जोंक को जिंदा बाहर निकालने में सफलता हासिल की। समय पर और सटीक उपचार मिलने से मरीज की जान बच गई। सफल प्रक्रिया के बाद सुरेश दत्त की हालत में तुरंत सुधार देखा गया और उन्हें उसी दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
आईजीएमसी के डॉक्टरों की इस उपलब्धि की स्वास्थ्य क्षेत्र में सराहना की जा रही है, जिसे उनकी कुशलता और त्वरित निर्णय क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
