बिलासपुर, 24 फरवरी। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बिलासपुर डिपो द्वारा बिलासपुर–चन्दपुर रूट को कथित तौर पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी को लेकर क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है। छात्र संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी सार्वजनिक सूचना या पारदर्शी प्रक्रिया के इस रूट का निजीकरण किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों लोग सीधे प्रभावित होंगे।
प्रस्तावित बदलाव से गौटा, सिल्हा गाँव, सिकरोहा और चन्दपुर के निवासी विशेष रूप से प्रभावित होंगे। यह रूट बिलासपुर–ब्रह्मपुखर–नमहोल–गौटा–साईं नोडवां–सिल्हा गाँव–सिकरोहा होते हुए चन्दपुर तक जाता है और इन गांवों के लिए जीवनरेखा माना जाता है।
छात्रों का कहना है कि सुबह 9:45 बजे बिलासपुर पहुँचने और शाम 4:25 बजे वापस चलने वाली यह एकमात्र बस कॉलेज और स्कूल के समय के अनुरूप है। वर्तमान में लगभग 20 कॉलेज छात्र और 10 स्कूली बच्चे HRTC स्टूडेंट पास का लाभ लेकर इसी बस से आवागमन करते हैं। यदि यह सेवा निजी ऑपरेटर को दे दी गई, तो स्टूडेंट पास की सुविधा समाप्त हो जाएगी और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी बस बंद होने पर छात्रों को पास सुविधा का लाभ लेने के लिए NH-205 (मुख्य सड़क) तक लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ेगी। सड़क के समीप रहने वाले छात्रों को करीब 7 किलोमीटर, जबकि दूरदराज के गांवों के छात्रों को 10 किलोमीटर से अधिक पैदल चलना पड़ेगा। पहाड़ी और दुर्गम रास्तों पर इतनी दूरी रोजाना तय करना छात्रों के लिए बेहद कठिन और असुरक्षित बताया जा रहा है।
छात्र संघ और स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि इस लाइफलाइन रूट पर HRTC की मौजूदा सेवा को यथावत रखा जाए। उनका कहना है कि यदि निजी बस को अनुमति देनी ही है, तो उसे किसी अन्य समय पर संचालित किया जाए, लेकिन सुबह 9:45 बजे और शाम 4:25 बजे चलने वाली सरकारी बस सेवा से छेड़छाड़ न की जाए।
प्रभावित छात्रों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि परिवहन विभाग ने इस कथित ‘पर्दे के पीछे’ चल रही प्रक्रिया को तुरंत नहीं रोका, तो वे बिलासपुर स्थित आरएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना देने को मजबूर होंगे।
