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हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) द्वारा हाईवे पर बस यात्रियों की सुविधा के लिए अधिकृत ढाबों में संचालकों की मनमर्जी चल रही है। ये सवाल, एक खास वजह के कारण पैदा हुआ है। निगम के एक यात्री द्वारा किरतपुर के समीप बूंगा साहिब में स्थित ढाबे के कच्चे बिल की प्रतिलिपि भेजी गई है।
तर्क ये है कि निगम द्वारा सामान्य बस यात्री के लिए 100 रुपए की थाली का रेट अप्रूव है, जबकि ढाबा संचालक द्वारा 120 रुपए प्रति थाली लिए गए। साथ ही पक्के बिल की बजाए कच्ची रसीद थमा दी गई। मामला 21 फरवरी का है। एक यात्री ने को 21 जनवरी का एक कच्चा बिल भेजा है, जो कि किरतपुर के समीप बूंगा साहिब स्थित अधिकृत ढाबे का बताया जा रहा है।
यात्री का दावा है कि सामान्य बस यात्रियों के लिए निगम द्वारा 100 रुपये प्रति थाली का रेट निर्धारित किया गया है, लेकिन मौके पर उससे 120 रुपये वसूले गए। इतना ही नहीं, पक्के बिल की बजाय कच्ची रसीद थमा दी गई। यात्री ने यह भी आरोप लगाया कि ढाबे के मेन्यू कार्ड में थाली का मूल्य 170 रुपये अंकित है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यात्री आपत्ति न करे तो उससे 170 रुपये तक वसूले जा सकते हैं, जबकि आपत्ति करने पर 120 रुपये में समझौता कर लिया जाता है।
निगम के निर्धारित मानकों के अनुसार 100 रुपये की थाली में दाल-चावल, एक सब्जी, तीन रोटियां, रायता और सलाद शामिल है। चाय का मूल्य 10 रुपये तय है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश ढाबों पर चाय 15 रुपये या उससे अधिक में बेची जाती है। इससे यह आशंका भी पैदा होती है कि निर्धारित रेट और वास्तविक वसूली के बीच अंतर मौजूद है।
जानकारी के मुताबिक चंडीगढ़ से मनाली मार्ग पर 12 से 15 ढाबे अधिकृत हैं। चंडीगढ़-हरिद्वार मार्ग पर तीन, चंडीगढ़-दिल्ली हाईवे पर पांच और धर्मशाला हाईवे पर लगभग 10 ढाबों को मंजूरी दी गई है, जहां निगम की बसें नियमित रूप से रुकती हैं। वॉल्वो और एसी बस यात्रियों के लिए 180 रुपये प्रति थाली का रेट निर्धारित है।
मामले ने निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्या अधिकृत ढाबों की समय-समय पर जांच की जाती है? क्या खाने की गुणवत्ता और रेट सूची का सत्यापन होता है? यात्रियों का कहना है कि यदि निगरानी प्रभावी हो तो ओवरचार्जिंग जैसी शिकायतें सामने न आएं।
इस संबंध में HRTC के प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि यदि कोई लिखित शिकायत मिलती है तो जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम न केवल यात्रियों की सुरक्षित यात्रा के लिए, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए भी कटिबद्ध है। ओवरचार्जिंग किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
फिलहाल, यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि अधिकृत ढाबों पर पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि यात्रियों को तय दरों पर बेहतर सुविधा मिल सके और निगम की साख भी बनी रहे।
