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शिमला, 06 जनवरी। बहुचर्चित पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी अरविंद राजटा को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अरविंद राजटा लंबे समय से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में थे। न्यायमूर्ति विरेंदर सिंह ने उनकी जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले के ट्रायल में देरी की प्रबल आशंका है और किसी भी आरोपी को ट्रायल से पहले अनिश्चित काल तक हिरासत में रखना न्यायोचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी को जांच के लिए पर्याप्त समय मिल चुका है और केवल आशंकाओं के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने जमानत देते समय आवश्यक शर्तें भी लगाई हैं, ताकि आरोपी जांच और ट्रायल में पूरा सहयोग करे।
उल्लेखनीय है कि यह मामला अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों को दी जाने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति से जुड़ा हुआ है। ईडी के अनुसार हिमाचल प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत इन वर्गों के छात्रों की छात्रवृत्ति राशि के आवंटन और वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कथित घोटाले में उच्च शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी, निजी शिक्षण संस्थान और बैंक भी शामिल रहे हैं। ईडी के मुताबिक फर्जी दाखिलों, गलत दस्तावेजों और मिलीभगत के जरिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति राशि का गबन किया गया।
हाईकोर्ट के इस फैसले को घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों के लिए भी अहम माना जा रहा है, जबकि मामले की जांच और ट्रायल आगे भी जारी रहेगा।
