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शिमला, 02 जनवरी। चार महीने लंबे इंतजार के बाद आखिरकार इंद्र देवता मेहरबान हुए हैं। सीजन की पहली बर्फबारी ने मंडी जिले की सबसे ऊंची चोटियों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को सफेद चादर में ढक दिया है। शिकारी देवी, कमरुनाग और शैटाधार में गिरी बर्फ ने जहां पहाड़ों की रौनक लौटा दी है, वहीं मैदानी इलाकों में हुई बारिश से किसानों, बागवानों और देव समाज के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मौसम के इस बदले मिजाज के साथ ही प्रदेश में ठंड का असर भी तेज हो गया है।
प्रशासन ने पहले से एहतियात बरतते हुए शिकारी देवी मंदिर के कपाट बंद कर दिए हैं। मंदिर परिसर में मौजूद दुकानदारों और अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, कमरुनाग मंदिर के कपाट अभी आधिकारिक तौर पर बंद नहीं किए गए हैं, हालांकि मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
निचले क्षेत्रों में हुई बारिश से किसान गेहूं की बिजाई की तैयारियों में जुट गए हैं। सेब बागानों के लिए भी यह बारिश और बर्फबारी बेहद लाभकारी मानी जा रही है। किसानों और बागवानों का कहना है कि यह नमी आने वाले सीजन के लिए संजीवनी साबित होगी। स्थानीय किसान उत्तम चंद, राजीव ठाकुर, मुरारी लाल, दीपक और अन्य ने बताया कि लंबे सूखे के बाद यह बारिश-बर्फबारी फसलों के लिए वरदान है।
बागवानी विशेषज्ञ के अनुसार सेब के पौधों के लिए सर्दियों में पर्याप्त ठंड और बर्फबारी बेहद जरूरी होती है। इससे पौधों की प्राकृतिक जरूरत पूरी होती है और आने वाले सीजन में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ जाती है।
बीते 24 घंटों में प्रदेश के कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी दर्ज की गई है। लाहौल-स्पीति के कोकसर, सिस्सू, रोहतांग, कुंजम, शिंकुला दर्रा, बारालाचा और अटल टनल रोहतांग के आसपास बर्फ के फाहे गिरे। चंबा के जोत और मणिमहेश, शिमला के कुफरी और नारकंडा तथा कुल्लू के सोलंग नाला में भी हिमपात हुआ। वहीं ऊना में 2.2 मिलीमीटर और हमीरपुर के नेरी में 2.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
बारिश और बर्फबारी के बाद प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में तेज गिरावट आई है। सुबह-शाम और रात के समय ठंड का असर और बढ़ गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने अगले 72 घंटों तक शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की है। यह अलर्ट ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर और कांगड़ा जिलों के लिए दिया गया है। लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
लाहौल-स्पीति के कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान माइनस 6 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। शिमला का अधिकतम तापमान 10.0 डिग्री, कुफरी का 6.1 डिग्री, कुकुमसैरी का 4.7 डिग्री, मनाली का 9.4 डिग्री और नाहन का तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में दिसंबर माह लगभग सूखा रहा। एक से 31 दिसंबर के बीच सामान्य से 99 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान मात्र 0.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 36.2 मिलीमीटर मानी जाती है। केवल लाहौल-स्पीति में 0.7 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इससे पहले 1902, 1907, 1925, 1939 और 1993 में दिसंबर इतना सूखा रहा था। करीब 32 साल बाद एक बार फिर दिसंबर में बारिश न के बराबर दर्ज हुई है।
