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शिमला, 31 जनवरी। हिमाचल प्रदेश में अप्रैल 2026 में खाली होने वाली राज्यसभा की एक सीट ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। कांग्रेस के भीतर इस सीट को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है और अब यह मामला सिर्फ दावेदारों तक सीमित नहीं, बल्कि पार्टी की अंदरूनी राजनीति और हाईकमान बनाम स्थानीय नेतृत्व की बहस से भी जुड़ता नजर आ रहा है।
अब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और हिमाचल कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को इस सीट का प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। मगर अब इस दौड़ में एक तीसरा और ‘बाहरी’ नाम जुड़ने से पार्टी के भीतर हलचल और बढ़ गई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान गांधी परिवार की करीबी मानी जाने वाली रजनी पाटिल को हिमाचल से राज्यसभा भेजने के विकल्प पर विचार कर रहा है। वर्तमान में वह महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन 6 अप्रैल 2026 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। महाराष्ट्र में बदले सियासी समीकरणों के चलते वहां से दोबारा चुना जाना उनके लिए आसान नहीं माना जा रहा।
सूत्र बताते हैं कि हाईकमान हिमाचल के शीर्ष नेतृत्व से इस मुद्दे पर चर्चा कर चुका है। इस दौरान फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव का अनुभव भी सामने रखा गया, जब कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव में गैर-हिमाचली उम्मीदवार को टिकट देने से विधायकों में असंतोष उभरा था, जिससे सरकार तक संकट में आ गई थी। कांग्रेस इस बार वैसी स्थिति दोहराना नहीं चाहती।
रजनी पाटिल वर्तमान में हिमाचल कांग्रेस की प्रभारी भी हैं। बीते कुछ समय से उनके लगातार हिमाचल दौरे और संगठन को मजबूत करने की कोशिशों को संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। उनकी सक्रियता ने आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह की दावेदारी को सीधी चुनौती दी है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा को राज्यसभा भेजने के पक्ष में माने जाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांगड़ा से उन्हें टिकट दिए जाने के पीछे भी सीएम की सहमति को अहम माना गया था। हालांकि, रजनी पाटिल से भी सीएम के संबंध बेहतर बताए जाते हैं, ऐसे में अंतिम फैसला हाईकमान पर छोड़ा जा सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के भीतर होलीलॉज पर आस्था रखने वाला धड़ा प्रतिभा सिंह को राज्यसभा भेजने की वकालत कर रहा है। समर्थकों का तर्क है कि उनके नेतृत्व में लड़े गए विधानसभा चुनाव में पार्टी को सत्ता मिली थी, इसलिए उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
भाजपा की राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। ऐसे में मार्च के दौरान हिमाचल की इस राज्यसभा सीट के लिए चुनाव कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
68 सदस्यीय हिमाचल विधानसभा में बहुमत के लिए 35 विधायकों की जरूरत होती है, जबकि कांग्रेस के पास फिलहाल 40 विधायक हैं। संख्याबल के लिहाज से स्थिति मजबूत है, लेकिन अंदरूनी असंतोष पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
