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शिमला, 09 जनवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश सरकार राज्य के उन पात्र गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध करवाएगी, जो अभी तक कच्चे मकानों में रह रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षित आवास केवल बुनियादी आवश्यकता ही नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामाजिक अधिकार है और सरकार इसे सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री आज यहां पंचायती राज विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अतिनिर्धन परिवारों (पूअरेस्ट ऑफ द पूअर) के चयन के लिए किए गए सर्वेक्षण के प्रथम चरण में 27,715 परिवारों को शामिल किया गया है। ये वे परिवार हैं जो पिछले 20 वर्षों से आईआरडीपी में शामिल होने के बावजूद अब तक पक्का मकान प्राप्त नहीं कर सके हैं।
उन्होंने बताया कि प्रथम चरण के सर्वेक्षण में वार्षिक आय सीमा 50 हजार रुपये निर्धारित की गई थी और इसमें उन परिवारों को शामिल नहीं किया गया था जिनके पास पहले से पक्का मकान था। वहीं, सर्वेक्षण के दूसरे चरण में ऐसे परिवारों को भी शामिल किया गया है जिनके पास पक्का मकान उपलब्ध है। इस चरण में 35,355 अतिरिक्त परिवारों को अतिनिर्धन श्रेणी में जोड़ा गया, जिससे कुल संख्या बढ़कर 63,070 हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीसरे चरण में अनाथों, दिव्यांगों और विधवाओं को भी निर्धन परिवारों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके बाद चौथे और पांचवें चरण में भी सर्वेक्षण किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना से वंचित न रहे। उन्होंने दोहराया कि चयन प्रक्रिया में प्रत्येक चरण में मापदंडों का उदारीकरण किया जा रहा है और कोई भी पात्र परिवार आईआरडीपी से बाहर नहीं रहेगा।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पंचायती राज विभाग को और सुदृढ़ करने के लिए रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा तथा पंचायतों में कनिष्ठ अभियंताओं के पद भी भरे जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार सामाजिक अधिकारिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और समाज के वंचित, उपेक्षित एवं कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल मकान निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन स्तर उपलब्ध करवाना है। इसके लिए मूलभूत सुविधाओं, स्वच्छता, पेयजल और आजीविका के अवसरों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही सरकार की ‘व्यवस्था परिवर्तन’ नीति का मूल उद्देश्य है।
